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आगरा को 100 करोड़ का झटका: रोमसंस ने जेवर मेडिकल डिवाइस पार्क में फैक्टरी लगाने का किया फैसला:-

आगरा। पर्यटन नगरी आगरा को एक बार फिर बड़ा आर्थिक झटका लगा है। प्रतिष्ठित मेडिकल सर्जिकल उपकरण निर्माता कंपनी रोमसंस ने अपने नए विस्तार के लिए आगरा की जगह जेवर (नोएडा) को चुना है। कंपनी ने जेवर मेडिकल डिवाइस पार्क में 100 करोड़ रुपये के निवेश से नई फैक्टरी लगाने के लिए सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस फैसले से आगरा को न केवल निवेश का नुकसान हुआ है, बल्कि रोजगार के संभावित अवसर भी हाथ से निकल गए हैं।
मंगलवार को लखनऊ में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में यह एमओयू साइन हुआ। निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के बाद मुख्यमंत्री ने रोमसंस के मालिक किशोर खन्ना को सम्मानित भी किया। हालांकि, यह उपलब्धि आगरा के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि बीते कुछ वर्षों में शहर से लगातार निवेश बाहर जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आगरा में निवेश न आने का सबसे बड़ा कारण ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) के सख्त पर्यावरणीय नियम हैं। इन नियमों के चलते नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों के विस्तार पर रोक लगी हुई है। यही वजह है कि निवेशक चाहकर भी आगरा में बड़े प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा को फार्मास्युटिकल हब के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन एक एकड़ जमीन तक चिह्नित नहीं कर सका। यदि यह योजना धरातल पर उतरती, तो संभव है कि रोमसंस जैसी कंपनी आगरा में ही निवेश करती।
रोमसंस के मालिक किशोर खन्ना ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात करती है और इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन की उपलब्धता और लॉजिस्टिक सुविधाएं जरूरी हैं। आगरा में जमीन न मिलने और विस्तार पर प्रतिबंध के कारण कंपनी को जेवर का रुख करना पड़ा। वर्तमान में रोमसंस की आगरा के नुनिहाई क्षेत्र में दो इकाइयां संचालित हैं, लेकिन वहां विस्तार की कोई संभावना नहीं बची है।
रोमसंस से पहले भी कई बड़े निवेश आगरा से फिसल चुके हैं। हांगकांग की एक बड़ी कंपनी, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल और लिथियम बैटरी के दो बड़े प्लांट आगरा में लगाना चाहती थी, 200 एकड़ जमीन न मिलने के कारण जेवर चली गई। इससे लगभग एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आगरा के हाथ से निकल गया।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश मंत्री मनीष अग्रवाल रावी का कहना है कि जेवर में बन रहा एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। वहीं, आगरा ऐतिहासिक विरासत और पर्यावरणीय नियमों के बीच फंसा हुआ है। यदि जल्द ही भूमि अधिग्रहण और टीटीजेड नियमों के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो आने वाले समय में आगरा के पुराने उद्योगपति भी शहर छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।

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