बजट 2026: यूपी के 45 शहरों के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, 900 करोड़ से बदलेगा शहरी नक्शा
केंद्रीय बजट 2026 उत्तर प्रदेश के छोटे और मझोले शहरों के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आया है। इस बजट में टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे यूपी के करीब 45 शहरों को लगभग 900 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। यह कदम न सिर्फ शहरी सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि महानगरों की ओर हो रहे पलायन को भी कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार ने बजट 2026 में टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए कुल आवंटन में 5,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की है। इसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और आबादी वाले राज्य को मिलेगा। नगर विकास विभाग के अनुसार, यह राशि पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खर्च की जाएगी, ताकि विकास कार्य टिकाऊ और योजनाबद्ध तरीके से पूरे हो सकें।
इस फंड का उपयोग शहरों की सड़क और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, बिजली और पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्क और डिजिटल सेवाओं जैसी शहरी सुविधाओं के विस्तार पर किया जाएगा। इसके अलावा, उद्योग और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यहां टियर-2 श्रेणी के 15 शहर हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, गोरखपुर, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, झांसी और मथुरा शामिल हैं। इन शहरों की आबादी पांच लाख से अधिक है और ये पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
वहीं, टियर-3 श्रेणी में 30 से अधिक शहर चिन्हित किए गए हैं, जिनकी आबादी एक से तीन लाख के बीच है। इनमें पूर्वी यूपी के 8, पश्चिमी यूपी के 6, मध्य यूपी के 6, बुंदेलखंड के 5 और अन्य क्षेत्रों के 5 शहर शामिल हैं। अब तक ये शहर संसाधनों की कमी के कारण अपेक्षित विकास नहीं कर पाए थे, लेकिन बजट 2026 से इनके कायाकल्प की उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब छोटे और मझोले शहरों में बेहतर सड़कें, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो लोगों को बड़े महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इससे संतुलित शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा और महानगरों पर बढ़ता दबाव भी कम होगा।
हालांकि स्मार्ट सिटी योजना के तहत कुछ बड़े शहरों में काम हुआ है, लेकिन अब भी छोटे शहरों में बुनियादी और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है। बजट 2026 का यह प्रावधान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।