लखनऊ

यूपी: संकट में 58 मदरसा मिनी आईटीआई, बजट पर लगी रोक; क्या बंद हो जाएंगे ये ट्रेनिंग सेंटर?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले मदरसा मिनी आईटीआई (Mini ITI) के भविष्य पर काले बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के 58 मदरसों में चल रहे इन तकनीकी केंद्रों का संचालन किसी भी वक्त बंद हो सकता है। मानकों की अनदेखी और जांच रिपोर्ट में मिली कमियों के आधार पर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने इनका बजट जारी करने पर रोक लगा दी है।

​क्यों फंसा है 58 केंद्रों का बजट?

​मदरसा शिक्षा परिषद के तहत विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए साल 2004 में इन केंद्रों की शुरुआत की गई थी। वर्तमान में प्रदेश के 47 जिलों में 126 मदरसा मिनी आईटीआई संचालित हैं। हाल ही में निदेशालय द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • 35 मदरसों में केवल 2 ट्रेड संचालित मिले।
  • 12 मदरसों में मात्र 1 ट्रेड ही चल रहा था।
  • 2 मदरसे ऐसे पाए गए जहाँ एक भी ट्रेड संचालित नहीं था।
  • 7 मदरसों में ट्रेड का पूरा खर्च मदरसा प्रबंधन खुद उठा रहा था, जो सरकारी नियमों के विरुद्ध है।

​इन कमियों के आधार पर निदेशालय ने शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है, जिसके कारण इन 58 केंद्रों का बजट रोक दिया गया है।

​8 महीने से वेतन को तरस रहे कर्मचारी

​बजट रुकने का सबसे बुरा असर वहां कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ा है। मिनी आईटीआई में अनुदेशक (Instructor), स्टोरकीपर और चपरासी समेत लगभग 510 कर्मचारी तैनात हैं। बजट न मिलने के कारण पिछले 8 महीनों से इन्हें वेतन और एरियर का भुगतान नहीं हो सका है। जहाँ 68 मिनी आईटीआई के लिए 3.10 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं, वहीं इन 58 केंद्रों के कर्मचारी अब दाने-दाने को मोहताज हैं।

​क्या कहते हैं जिम्मेदार?

​मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार और मदरसा वोकेशनल ट्रेनिंग की निदेशक अंजना सिरोही के अनुसार, बजट आवंटन न होने के कारण ही भुगतान लंबित है। उन्होंने बताया कि 10 फरवरी को होने वाली उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक में इन केंद्रों के भविष्य और बजट पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

​वहीं, मदरसा मिनी आईटीआई स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की महासचिव सूफिया बानो ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी सेंटर पर पद खाली है या ट्रेड कम हैं, तो इसके लिए कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हैं। ट्रेड तभी चलेंगे जब सरकार प्रशिक्षकों की नियुक्ति करेगी, क्योंकि यह अधिकार मदरसों के पास नहीं है।

​मिनी आईटीआई के लिए क्या हैं मानक?

​सरकारी नियमों के अनुसार, एक आदर्श मदरसा मिनी आईटीआई के लिए निम्नलिखित मानक अनिवार्य हैं:

  1. ट्रेड की संख्या: मदरसा प्रबंधन को कम से कम 3 ट्रेड संचालित करने होते हैं।
  2. छात्रों की संख्या: प्रत्येक ट्रेड में न्यूनतम 12 और अधिकतम 16 विद्यार्थी होने चाहिए।
  3. स्टाफ: तीन ट्रेड वाले मदरसे में 3 अनुदेशक, 1 चपरासी और 1 स्टोरकीपर का होना अनिवार्य है।
  4. अवधि: प्रशिक्षण की अवधि 1 से 2 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

​निष्कर्ष

​फिलहाल, 58 मदरसों के हजारों छात्रों और सैकड़ों कर्मचारियों की निगाहें शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि सरकार ने कड़ा रुख अपनाया, तो यूपी में अल्पसंख्यक तकनीकी शिक्षा के एक बड़े ढांचे को नुकसान पहुँच सकता है।

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