संभल पुलिस में बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के आरोप में 8 पुलिसकर्मी निलंबित:-
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार बिश्नोई ने एसओजी (SOG) की पूरी टीम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। टीम पर एक कबाड़ी से अवैध वसूली करने और उसका माल जब्त करने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 2 फरवरी 2026 की रात की है। मुरादाबाद के बिलारी निवासी जफरूद्दीन अपने बेटे आस मोहम्मद के साथ बाइक पर मोबाइल की प्लेटों का कबाड़ लेकर संभल के लाडम सराय की ओर जा रहे थे। रास्ते में एसओजी टीम ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ के नाम पर चौधरी सराय पुलिस चौकी ले आए।
आरोप है कि पिता-पुत्र को छोड़ने के बदले में बिचौलियों के माध्यम से सौदा किया गया और 30 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। इतना ही नहीं, टीम ने मोबाइल की प्लेटों को गलाकर निकाली गई कीमती धातु का कट्टा भी अपने पास रख लिया। जब अगले दिन कबाड़ी ने अपनी धातु वापस मांगी, तो टीम ने उसे छोड़ने के बदले 40 हजार रुपये की और मांग कर दी। पीड़ित के अनुसार, उस धातु की कीमत भी लगभग 40 हजार रुपये ही थी।
जांच में दोषी पाई गई टीम
जब यह मामला एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (CO) आलोक कुमार भाटी को जांच सौंपी। सीओ की जांच रिपोर्ट में वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट मिलते ही एसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एसओजी प्रभारी समेत सभी 8 सदस्यों को सस्पेंड कर दिया।
निलंबित होने वाले पुलिसकर्मियों के नाम:
- एसआई मोहित चौधरी (तत्कालीन प्रभारी)
- हेड कांस्टेबल कुलवंत
- हेड कांस्टेबल अरशद
- कांस्टेबल अजनबी
- कांस्टेबल आयुष
- कांस्टेबल विवेक
- कांस्टेबल बृजेश
- कांस्टेबल हिरेश
अब एसओजी की कमान बोबिंद्र शर्मा को सौंपी गई है।
काम में भी ‘फिसड्डी’ साबित हुई टीम
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि यह टीम न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त थी, बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी पूरी तरह विफल रही थी। जिले के कई हाई-प्रोफाइल मामलों को सुलझाने में इस टीम की भूमिका शून्य रही।
- भाजपा नेता हत्याकांड: जुनावई में भाजपा नेता गुलफाम सिंह की हत्या का मुख्य आरोपी एसओजी की नाक के नीचे से निकल गया और उसने बदायूं कोर्ट में सरेंडर कर दिया, लेकिन टीम उसे पकड़ नहीं पाई।
- दोहरे हत्याकांड में विफलता: धनारी क्षेत्र में दो भाइयों की हत्या का आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और अंत में उसने भी कोर्ट की शरण ली।
- मासूम की तलाश में नाकाम: कैलादेवी क्षेत्र में सात वर्षीय बच्ची के लापता होने के संवेदनशील मामले में भी यह टीम कोई सुराग लगाने में नाकाम रही थी।
निष्कर्ष
संभल एसपी की इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर एक कड़ा संदेश दिया है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां एक ओर पुलिस अपराधियों पर लगाम कसने का दावा करती है, वहीं इस तरह की घटनाएं जनता के बीच पुलिस की छवि को धूमिल करती हैं। अब विभागीय जांच के बाद इन पुलिसकर्मियों पर और भी कड़ी गाज गिर सकती है।