आगरा

यूपी पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल: आगरा में दरोगा ने बुलडोजर मालिक को धमकाकर वसूले पैसे, जांच शुरू:-

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद से खाकी को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ शाहगंज थाने में तैनात एक दरोगा और सिपाही पर एक बुलडोजर मालिक को जबरन थाने में बिठाने और उसे छोड़ने के बदले 25 हजार रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की शिकायत मिलने के बाद डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने कड़ा रुख अपनाते हुए एसीपी लोहामंडी को जांच के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​पीड़ित रईस खां, जो शाहगंज के सराय ख्वाजा इलाके के निवासी हैं, उन्होंने डीसीपी सिटी को दिए प्रार्थना पत्र में आपबीती सुनाई है। रईस के मुताबिक, उन्होंने साल 2021 में करीब 10 लाख रुपये जमा करके एक बुलडोजर फाइनेंस करवाया था। शुरुआत में उन्होंने 15 किस्तें समय पर भरीं, लेकिन बाद में एक दुर्घटना में घायल होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और वे किस्तें जमा नहीं कर सके।

​किस्तें न चुका पाने के कारण फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे। इस उत्पीड़न से तंग आकर रईस ने 2 फरवरी 2026 को डीसीपी सिटी कार्यालय में मदद की गुहार लगाई थी। लेकिन मदद मिलने के बजाय, पुलिस ने ही उन्हें अपना निशाना बना लिया।

थाने ले जाकर वसूली का खेल

​आरोप है कि 7 फरवरी को शाहगंज थाने का एक दरोगा और सिपाही रईस के घर पहुंचे और उन्हें जबरन बाइक पर बिठाकर थाने ले आए। रईस का दावा है कि थाने में उन्हें घंटों बिना किसी ठोस कारण के बिठाए रखा गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। छोड़ने के बदले पुलिसकर्मियों ने उनसे 1 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी।

​जब रईस के परिजनों और स्थानीय पार्षद ने पुलिस से मध्यस्थता की, तो मामला 25 हजार रुपये पर तय हुआ। रईस ने बताया कि उनके पास नकद पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने मोबाइल से पार्षद के नंबर पर 5000 रुपये और अपने भाई के मोबाइल से 20 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। इसके बाद ही उन्हें रात करीब 11:30 बजे थाने से रिहा किया गया।

नाम बदलकर डराने का आरोप

​पीड़ित ने अपनी शिकायत में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। रईस के अनुसार, दरोगा ने शुरुआत में अपना नाम ‘रजत’ बताया था, लेकिन बाद में उसका असली नाम सामने आया। इतना ही नहीं, आरोपी सिपाही के बारे में यह भी पता चला है कि उसका तबादला यातायात पुलिस (Traffic Police) में हो चुका है, लेकिन वह अभी भी थाने में जमा हुआ है। वह खुद को जनपद के एक रसूखदार इंस्पेक्टर का भतीजा बताकर लोगों पर रौब झाड़ता है।

DCP सिटी ने दिए सख्त निर्देश

​बृहस्पतिवार को जब रईस खां लेनदेन के डिजिटल साक्ष्यों (Screenshots) के साथ डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास से मिले, तो अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। डीसीपी ने तुरंत एसीपी लोहामंडी को जांच सौंपी और आश्वासन दिया कि पीड़ित के पैसे वापस दिलाए जाएंगे।

डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास का बयान:

​”शिकायतकर्ता ने पुलिसकर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश एसीपी को दे दिए गए हैं। यदि दरोगा या सिपाही दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ सख्त कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।”

निष्कर्ष

​यह मामला यूपी पुलिस की उस छवि को झटका देता है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में दोषी पाए जाने पर इन पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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