कासगंज में दिल दहला देने वाली घटना: आर्थिक तंगी और बीमारी ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, 5 शव मिलने से सनसनी
कासगंज (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अमांपुर इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक छोटे से कमरे में रहने वाले वेल्डिंग कारीगर सत्यवीर और उसके परिवार के पांच सदस्यों के शव मिलने से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गरीबी, कर्ज और मासूम बेटे की गंभीर बीमारी ने इस हंसते-खेलते परिवार के सपनों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार शाम करीब 6:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि पेट्रोल पंप के पीछे रहने वाले सत्यवीर का मकान कई दिनों से अंदर से बंद है। जब पुलिस ने फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में दरवाजा कटवाकर अंदर प्रवेश किया, तो मंजर खौफनाक था। घर के मुखिया सत्यवीर (45) का शव फंदे पर लटका हुआ था, जबकि उनकी पत्नी रामश्री (40), बड़ी बेटी प्राची (14), छोटी बेटी आकांक्षा (13) और बेटे गिरीश (10) के शव जमीन पर पड़े थे।
आर्थिक तंगी और बेटे की बीमारी बनी काल
सत्यवीर करीब 8 साल पहले अपने गांव नगला भोजराज को छोड़कर अमांपुर आया था ताकि अपने बच्चों को अच्छा भविष्य दे सके। वह वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन पिछले कुछ समय से आर्थिक हालात बिगड़ते चले गए। सत्यवीर के बेटे गिरीश को न्यूरो (सिर की नस) की गंभीर समस्या थी, जिसके इलाज में काफी पैसा खर्च हो रहा था।
डीआईजी प्रभाकर चौधरी के मुताबिक, सत्यवीर गहरे अवसाद (Depression) में था। उसने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मदद मांगी थी, लेकिन कहीं से उम्मीद की किरण नजर नहीं आई। बताया जा रहा है कि घटना से चार दिन पहले वह गांव भी गया था, लेकिन वहां से खाली हाथ लौटने के बाद वह पूरी तरह टूट गया।
घर में नहीं मिला एक दाना अनाज
पुलिस जब जांच के लिए घर के अंदर पहुंची, तो वहां की स्थिति देखकर अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। घर का चूल्हा ठंडा पड़ा था और आसपास खाने-पीने का कोई सामान नहीं था। ऐसा प्रतीत होता है कि परिवार ने पिछले दो-तीन दिनों से कुछ नहीं खाया था। तंगहाली का आलम यह था कि सत्यवीर ने हाल ही में अपने पड़ोसी से मात्र एक हजार रुपये उधार लिए थे।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी अंकिता शर्मा, जिलाधिकारी प्रणय सिंह और डीआईजी प्रभाकर चौधरी मौके पर पहुंचे। पुलिस का मानना है कि सत्यवीर ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को विषाक्त पदार्थ दिया या अन्य तरीके से उनकी जान ली और फिर स्वयं फंदे पर लटक गया। फिलहाल सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर दुख व्यक्त किया और इसे पूरी तरह से आर्थिक तंगी से जुड़ा मामला बताया।
निष्कर्ष
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे समाज में आज भी बुनियादी सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कितनी कमी है। एक पिता ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए गांव छोड़ा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।