उन्नाव रेलवे ट्रैक पर पिता-पुत्री के शव, कार में मोबाइल-पर्स मिलने के बावजूद 4 घंटे तक नहीं हो सकी शिनाख्त
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक दर्दनाक और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। सहजनी रेलवे क्रॉसिंग के पास डाउन ट्रैक पर सोमवार रात करीब नौ बजे एक 45 वर्षीय व्यक्ति और उसकी 14 वर्षीय बेटी के शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाए गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और जीआरपी मौके पर पहुंची, लेकिन पहचान की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
यह घटना कानपुर-लखनऊ डाउन रेलवे लाइन के खंभा नंबर 62/28 और 62/30 के बीच की बताई जा रही है। ट्रैक पर शव पड़े होने की जानकारी गेटमैन ने संबंधित अधिकारियों को दी थी। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को मृतक की कमर में कार की चाबी का छल्ला लगा मिला। घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर एक कार भी लावारिस हालत में खड़ी पाई गई, जिसका नंबर कानपुर का था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार के अंदर मोबाइल फोन और पर्स साफ दिखाई दे रहे थे। आशंका जताई जा रही थी कि कार की चाबी मृतक की कमर में लगी वही चाबी थी। इसके बावजूद पुलिस ने मौके पर ही चाबी निकालकर कार का दरवाजा खोलने की कोशिश नहीं की। यदि ऐसा किया जाता तो कार में रखे दस्तावेजों और मोबाइल फोन के जरिए पहचान तुरंत संभव हो सकती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस करीब चार घंटे तक नेटवर्क न आने का हवाला देती रही। जबकि आज के 5जी इंटरनेट युग में इस तरह का बहाना सवाल खड़े करता है। पुलिस एप के माध्यम से वाहन नंबर डालकर मालिक की जानकारी निकाली जा सकती थी। बताया जा रहा है कि वाहन का पंजीकरण कानपुर निवासी यश गुप्ता के नाम पर था, जो हरबंश मोहाल कछियाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस जानकारी की तत्काल पुष्टि नहीं की।
गंगाघाट थाने के अधिकारियों का कहना था कि पुलिस एप काम नहीं कर रहा था और नेटवर्क की समस्या आ रही थी। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और जीआरपी एक-दूसरे पर पंचनामा कार्रवाई टालते रहे, जिससे पहचान में अनावश्यक देरी हुई।
घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या तकनीकी संसाधनों की कमी थी या फिर लापरवाही? यदि कार और चाबी मौके पर मौजूद थे, तो पहचान की प्रक्रिया में देरी क्यों हुई?
फिलहाल, पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक तौर पर घटना को दुर्घटना या आत्महत्या की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते पहचान हो जाती तो परिजनों को जल्द सूचना दी जा सकती थी।