वाराणसी

वाराणसी-मिर्जापुर में आयकर विभाग का ‘ऑपरेशन क्लीन’: पहली बार AI और ड्रोन से बेनकाब हुआ करोड़ों का खनन घोटाला

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में आयकर विभाग (Income Tax Department) ने अब तक की सबसे बड़ी और हाईटेक छापेमारी को अंजाम दिया है। वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र के खनन कारोबारियों के खिलाफ चलाए गए इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने न केवल करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी है, बल्कि जांच के तरीकों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पूरे प्रदेश के कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया है।

पूर्वांचल में पहली बार हाईटेक स्ट्राइक

​यह पहली बार है जब आयकर विभाग ने पारंपरिक छापेमारी के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन मैपिंग का सहारा लिया है। बृहस्पतिवार को विभाग की 200 सदस्यीय टीम ने एक साथ छह बड़े खनन कारोबारियों के ठिकानों पर धावा बोला। इस पूरी कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि दिल्ली से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने गूगल मैप्स और ड्रोन कैमरों के जरिए खदानों का हवाई सर्वेक्षण किया।

AI ने 4 घंटे में खोल दी पोल

​अक्सर खनन के मामलों में जमीन के अंदर और स्टॉक में रखे माल की सटीक गणना करना मुश्किल होता है, जिसमें महीनों का समय लग जाता है। लेकिन इस बार विभाग ने AI सॉफ्टवेयर का उपयोग किया। ड्रोन से ली गई मैपिंग और तस्वीरों को जब सॉफ्टवेयर में फीड किया गया, तो महज 4 घंटे के भीतर डेटा इंटरप्रिटेशन के जरिए अवैध खनन और स्टॉक की सटीक जानकारी सामने आ गई। इस तकनीक ने कारोबारियों द्वारा कागजों में दिखाई गई हेराफेरी को तुरंत पकड़ लिया।

10 करोड़ की संपत्ति जब्त, बैंक खाते फ्रीज

​अब तक की मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने छापेमारी के दौरान 10 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी और कीमती संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, टीम को बड़ी संख्या में बेनामी खाते और संदिग्ध निवेश के सबूत मिले हैं। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 प्रमुख बैंक खातों पर प्रोहिबिटरी ऑर्डर (PO) जारी कर उन्हें फ्रीज कर दिया है।

रडार पर सफेदपोश और बड़े अधिकारी

​जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस करोड़ों के घोटाले में केवल कारोबारी ही शामिल नहीं हैं, बल्कि खनन विभाग के कई रसूखदार अधिकारी और सफेदपोश नेता भी जांच के घेरे में हैं। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के आवास समेत कई अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर टीम की उपस्थिति ने इस मामले को राजनीतिक रूप से भी गरमा दिया है। सूत्रों के अनुसार, जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों से कई बड़े नामों का खुलासा होना तय माना जा रहा है।

खनन माफियाओं में हड़कंप

​आयकर विभाग की इस ‘स्मार्ट’ कार्रवाई ने पूर्वांचल के अन्य जिलों के खनन माफियाओं की भी नींद उड़ा दी है। ड्रोन तकनीक के जरिए खदानों की गहराई और क्षेत्रफल का सटीक माप होने की वजह से अब चोरी छिपाना नामुमकिन हो गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों की पड़ताल अभी जारी है और आने वाले दिनों में जब्ती का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

​यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नया अध्याय है, जहाँ सरकारी विभाग अब तकनीक के मामले में अपराधियों से दो कदम आगे हैं। ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब डिजिटल युग में टैक्स चोरी करना आसान नहीं होगा।

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