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होली 2026: उत्तर प्रदेश में रंगों, उमंग और लोक-परंपराओं का महासंगम

फागुन का महीना आते ही उत्तर प्रदेश की हवाओं में अबीर-गुलाल और लोकगीतों की मिठास घुल गई है। साल 2026 की होली पूरे प्रदेश में अद्वितीय उत्साह के साथ मनाई जा रही है। मथुरा की गलियों से लेकर काशी के घाटों और अयोध्या के भव्य राम मंदिर तक, हर ओर ‘रंग, रस और राग’ का त्रिवेणी संगम देखने को मिल रहा है। बुधवार की सुबह होते ही टोलियां सड़कों पर निकल पड़ी हैं और पूरा प्रदेश उत्सव के सागर में सराबोर हो गया है।

काशी में रंगभरी एकादशी का उल्लास

​वाराणसी (काशी) में होली का स्वरूप भक्ति और मस्ती का अनूठा मिश्रण है। रंगभरी एकादशी के बाद आज बुधवार को काशी अपने चिर-परिचित अंदाज में होली मना रही है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस वर्ष की विशेष बात यह है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में पलाश (टेसू) के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है।

​श्रद्धालु मैदागिन से ढोल-मजीरों की थाप पर नाचते-गाते मंदिर पहुंच रहे हैं। यहाँ परंपरा है कि भक्त अपने आराध्य को केवल गुलाल ही नहीं चढ़ाते, बल्कि उन्हें सोहर और होली के पारंपरिक गीत भी सुनाते हैं। युवाओं की टोलियां ‘शिव बारात’ का स्वरूप धारण किए, भांग और ठंडई के आनंद में डूबी हुई नजर आ रही हैं।

मथुरा और अयोध्या: भक्ति का नया रंग

​ब्रज की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन इस बार अयोध्या में भी वैसी ही रौनक दिख रही है। राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद, अयोध्या की होली में भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया है। रामलला के दरबार में गुलाल उड़ाकर भक्त अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। वहीं मथुरा, वृंदावन और बरसाना में कान्हा की भक्ति में डूबे श्रद्धालु ‘होली है’ के जयकारों के साथ एक-दूसरे को सराबोर कर रहे हैं।

शाहजहांपुर: ‘लाट साहब’ की ऐतिहासिक और अनोखी परंपरा

​उत्तर प्रदेश की होली केवल रंगों तक सीमित नहीं है, इसमें कई ऐतिहासिक परंपराएं भी शामिल हैं। शाहजहांपुर में बुधवार को ‘बड़े लाट साहब’ और ‘छोटे लाट साहब’ का प्रसिद्ध जुलूस निकाला जा रहा है। यह जुलूस अपनी विशिष्टता के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय रहता है।

​परंपरा के अनुसार, सुबह 9 बजे कूंचालाला से बड़े लाट साहब का जुलूस शुरू हुआ। चौकसीनाथ मंदिर में मत्था टेकने के बाद उन्हें सराफा बाजार में एक विशेष भैंसागाड़ी पर सवार किया गया। सुरक्षा के लिहाज से यह जुलूस अर्द्धसैनिक बलों के घेरे में रहता है। मार्ग में लोग प्रतीकात्मक रूप से जूते-चप्पल और झाड़ू से लाट साहब का स्वागत करते हैं। अंत में, यह सवारी चौक कोतवाली पहुँचती है, जहाँ परंपरा के अनुसार उन्हें सलामी दी जाती है और नजराना पेश किया जाता है।

सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव

​उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में होली के अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं:

  • मथुरा: लठमार और फूलों वाली होली।
  • काशी: मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली और विश्वनाथ मंदिर में गुलाल।
  • शाहजहांपुर: लाट साहब का जुलूस।

​यह पर्व न केवल आपसी भाईचारे का प्रतीक है, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखता है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि लोग शांति और सौहार्द के साथ इस महापर्व का आनंद ले सकें।

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