कानपुर फर्जी डिग्रीकांड: अधिवक्ता शमशाद अली पर कसा शिकंजा, कॉल डिटेल्स से हुआ बड़ा खुलासा
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे हाई-प्रोफाइल फर्जी डिग्री रैकेट (Fake Degree Scam) में पुलिस की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में घिरे अधिवक्ता शमशाद अली की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा जांच में पुलिस के हाथ ऐसे डिजिटल सबूत लगे हैं, जो शमशाद और इस गिरोह के सरगना के बीच गहरे संबंधों की ओर इशारा कर रहे हैं।
कॉल डिटेल्स ने खोली पोल
पुलिस की सर्विलांस टीम और एसआईटी (SIT) ने जब जेल भेजे गए आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि अधिवक्ता शमशाद अली और गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा के बीच कई बार लंबी बातचीत हुई थी।
एडीसीपी साउथ और एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार के अनुसार, शमशाद न केवल आरोपियों के संपर्क में था, बल्कि एलएलबी की संदिग्ध डिग्रियां हासिल करने के मामले में भी उसका नाम मुख्य रूप से सामने आया है। इसी आधार पर पुलिस अब उसे दोबारा पूछताछ के लिए तलब करने की तैयारी कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 18 फरवरी को तब शुरू हुआ जब किदवईनगर पुलिस ने जूही कलां स्थित ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ के कार्यालय पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस को वहां से उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की लगभग 1,000 से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुईं।
पुलिस ने मौके से गिरोह के सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा (रायबरेली), नागेंद्र मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इन आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कानपुर के लगभग 10 अधिवक्ताओं को एलएलबी की फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई थीं, जिनमें शमशाद अली का नाम भी शामिल था।
सियासी दबाव और हाई वोल्टेज ड्रामा
बीते सोमवार को जब किदवईनगर पुलिस शमशाद अली को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई थी, तो वहां काफी हंगामा हुआ था। खबर के अनुसार, महापौर के अधिवक्ता बेटे अनुराग पांडेय अपने साथियों के साथ थाने पहुंचे और शमशाद को छोड़ने का दबाव बनाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। हालांकि, अब साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने फिर से कड़ा रुख अख्तियार किया है।
जांच के दायरे में 10 अन्य अधिवक्ता
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने स्पष्ट किया है कि केवल शमशाद ही नहीं, बल्कि उन सभी 10 अधिवक्ताओं की जांच की जा रही है जिनके नाम आरोपियों ने लिए हैं। पुलिस अब चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा रही है। शमशाद के खिलाफ बाबूपुरवा थाने में पहले से ही धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज है, जो उसकी स्थिति को और गंभीर बनाता है।
फरार साथियों की तलाश जारी
इस बड़े रैकेट में पुलिस अब शुभम दुबे, शेखू, मयंक भारद्वाज, मनीष उर्फ रवि और विनीत जैसे फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों के बाद कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है जिन्होंने फर्जी डिग्रियों के सहारे अपनी पेशेवर पहचान बनाई है।
निष्कर्ष
कानपुर का यह डिग्रीकांड शिक्षा व्यवस्था और कानूनी पेशे की शुचिता पर एक बड़ा प्रहार है। पुलिस की सक्रियता और कॉल डिटेल्स जैसे तकनीकी साक्ष्यों ने अब सफेदपोश अपराधियों के लिए घेराबंदी तेज कर दी है।