Hardoi: सराफ हत्याकांड में 10 साल बाद आया फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद; जानें क्या था पूरा मामला
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। लगभग 10 साल पहले हुए चर्चित सराफ रंजीत हत्याकांड में न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अपर जिला जज (कोर्ट संख्या-एक) कुसुमलता ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में नामजद एक अन्य आरोपी को पर्याप्त सबूतों की कमी के चलते कोर्ट ने बरी कर दिया है।
दोषियों पर लगा भारी जुर्माना
अदालत ने दोषियों—राजेंद्र लोध और कन्हैया उर्फ करिया—पर 32-32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि दोषी जुर्माना अदा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें दो-दो साल की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। यह फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है।
क्या थी पूरी घटना? (The Case History)
यह मामला 28 जुलाई 2016 का है। कासिमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कहली की निवासी प्रभादेवी ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके पति, रंजीत, गौसगंज बाजार में सराफे की दुकान चलाते थे।
घटना वाले दिन रंजीत अपनी दुकान बंद कर मोपेड से घर लौट रहे थे। उनके पास एक बैग था जिसमें नकद रुपये और कीमती जेवर रखे थे। जैसे ही वह जेपी इंटर कॉलेज के पास पहुंचे, एक बाइक पर सवार तीन बदमाशों ने उनकी मोपेड में टक्कर मार दी।
विरोध करने पर मारी थी गोली
लुटेरों ने रंजीत से जेवरों वाला बैग छीनने की कोशिश की। जब रंजीत ने इसका कड़ा विरोध किया, तो हमलावरों ने तमंचे से उनके पेट में गोली मार दी। लहूलुहान हालत में रंजीत को पहले सीएचसी संडीला ले जाया गया, जहाँ से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान अगले दिन, यानी 29 जुलाई 2016 को रंजीत ने दम तोड़ दिया।
विवेचना और अदालती कार्यवाही
पुलिस जांच के दौरान तीन संदिग्धों के नाम सामने आए थे:
- राजेंद्र लोध (अमीरखेड़ा, उन्नाव)
- कन्हैया उर्फ करिया (अंबेडकर गांव, बांगरमऊ)
- मानसिंह लोध (अतर्धनी)
पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ लूट और हत्या की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष के वकीलों ने तीनों को निर्दोष बताते हुए बरी करने की अपील की थी, लेकिन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के तर्कों और पेश किए गए सबूतों ने राजेंद्र और कन्हैया के अपराध को साबित कर दिया।
एक आरोपी हुआ बरी
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राजेंद्र और कन्हैया के खिलाफ अपराध साबित होता है, इसलिए उन्हें उम्रकैद दी जाती है। हालांकि, तीसरे आरोपी मानसिंह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य (Evidence) नहीं मिल सके, जिसके कारण उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
निष्कर्ष:
10 साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है। यह फैसला अपराधियों के बीच कड़ा संदेश भेजने का काम करेगा कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर से ही सही, सजा जरूर मिलती है।