वाराणसी

वाराणसी रोपवे: कैंट से गोदौलिया का सफर अब मिनटों में, जानें किराया और लेटेस्ट अपडेट

वाराणसी, जिसे दुनिया की सबसे पुरानी जीवित नगरी कहा जाता है, अब आधुनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रही है। काशी की तंग गलियों और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए बन रहा देश का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे (Public Transport Ropeway) अपने निर्माण के अंतिम चरण में है। हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रोपवे के किरायों (Fares) की घोषणा कर दी है।

कितना होगा किराया? (Proposed Fare Structure)

​प्रशासन ने आम जनता की जेब का ख्याल रखते हुए किरायों को ऑटो और टेम्पो के रेट के आसपास ही रखने की कोशिश की है। प्रस्तावित दरों के अनुसार:

रूट (Route)प्रस्तावित किराया (Fare)
कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया₹50
कैंट रेलवे स्टेशन से रथयात्रा₹40
कैंट रेलवे स्टेशन से काशी विद्यापीठ₹30

कमिश्नर एस. राजलिंगम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी है, जिस पर जल्द ही अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

मई 2026 तक पूरा होगा निर्माण

​वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, 15 मई 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूरा होने के बाद सुरक्षा मानकों की जांच के लिए लगभग तीन महीने का कड़ा ट्रायल किया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगस्त या सितंबर 2026 तक काशीवासी और यहां आने वाले पर्यटक आसमान से महादेव की नगरी का दीदार कर सकेंगे।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति

​वर्तमान में कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया या काशी विश्वनाथ मंदिर जाने में पर्यटकों को भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। पीक ऑवर्स में इस दूरी को तय करने में 45 मिनट से 1 घंटे का समय लग जाता है। रोपवे शुरू होने के बाद यह सफर मात्र 15-17 मिनट में पूरा हो जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शहर की सड़कों पर दबाव भी कम होगा।

स्टेशनों पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

​रोपवे के स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। हालांकि, अभी स्टेशनों के भीतर बनने वाली दुकानों के किराये पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि एक बार सेवा शुरू होने के बाद फुटफॉल (यात्रियों की संख्या) को देखते हुए कमर्शियल स्पेस का आवंटन किया जाएगा।

फेज-2 की भी तैयारी

​यह रोपवे प्रोजेक्ट का पहला चरण है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो प्रशासन शहर के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी रोपवे विस्तार की योजना (Phase-2) पर काम शुरू करेगा। इससे वाराणसी दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां रोपवे को मुख्यधारा के परिवहन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

निष्कर्ष

​वाराणसी रोपवे न केवल एक परिवहन का साधन है, बल्कि यह काशी के पर्यटन में एक नया आकर्षण भी जोड़ेगा। ₹30 से ₹50 के बीच का किराया इसे आम आदमी के लिए सुलभ बनाता है। अब बस इंतजार है मई महीने का, जब यह प्रोजेक्ट अपनी पूर्ण आकृति में नजर आएगा।

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