जंग का असर: एलपीजी सप्लाई में 30% कमी, उत्तर भारत की फ्लाइट टिकट ₹399 तक महंगी
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर भारत में गैस आपूर्ति और हवाई यात्रा की लागत पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई लगभग 30 प्रतिशत तक घट गई है, जिससे कई राज्यों में सिलेंडर की उपलब्धता कम हो गई है और लोगों को गैस लेने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है।
कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें
एलपीजी की कम आपूर्ति के कारण उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में स्थिति थोड़ी कठिन हो गई है। कई शहरों में लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ जगहों पर तो लोग रात से ही सिलेंडर लेने के लिए पहुंच रहे हैं। एजेंसियों का कहना है कि पहले की तुलना में उन्हें कम सिलेंडर मिल रहे हैं, जिसके कारण सभी ग्राहकों को समय पर गैस उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।
होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर असर
गैस की कमी का असर केवल घरों तक ही सीमित नहीं है। इसका प्रभाव होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी पड़ने लगा है। यदि आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं होती है तो कई छोटे होटल और ढाबों को अस्थायी रूप से बंद करने की नौबत आ सकती है। होटल मालिकों का कहना है कि एलपीजी उनके व्यवसाय की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक है और इसकी कमी से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
हवाई यात्रा भी हुई महंगी अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण एविएशन फ्यूल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी वजह से एयरलाइंस कंपनियों ने उत्तर भारत के लिए उड़ानों के टिकट लगभग ₹399 तक बढ़ा दिए हैं। यात्रियों को अब पहले की तुलना में ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें और बढ़ती हैं तो आने वाले समय में टिकट और महंगे हो सकते हैं।
परिवहन और अन्य क्षेत्रों पर भी असर की आशंका
ऊर्जा संकट का असर केवल गैस और हवाई यात्रा तक सीमित नहीं रह सकता। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा के खर्चों पर भी असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का प्रभाव सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
सरकार ने स्थिति पर रखी नजर
सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और गैस की सप्लाई को सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार वितरण प्रणाली को संतुलित करने और जरूरतमंद क्षेत्रों में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आगे क्या हो सकता हैविशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो भारत सहित कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं, ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का प्रभाव अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी की कमी, बढ़ती हवाई किराया दरें और व्यापार पर पड़ता असर इस बात का संकेत हैं कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर पड़ सकता है।