UP School Chalo Abhiyan: अब माध्यमिक स्कूलों में भी चलेगा नामांकन का महाअभियान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 8) तक सीमित रहने वाला ‘स्कूल चलो अभियान’ अब माध्यमिक विद्यालयों (कक्षा 9 से 12) में भी पूरी शक्ति के साथ लागू किया जाएगा। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ते ड्रॉप आउट रेट को कम करना है।
ड्रॉप आउट की चुनौती: 21 प्रतिशत छात्र छोड़ रहे हैं पढ़ाई
शिक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि कक्षा 8 उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 21 प्रतिशत विद्यार्थी अपनी पढ़ाई बंद कर देते हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कक्षा 8 में लगभग 37 लाख विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से केवल 79 प्रतिशत छात्र ही कक्षा 9 में प्रवेश लेते हैं।
इसका सीधा अर्थ यह है कि हर साल करीब 8.17 लाख छात्र शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो रहे हैं। इस ड्रॉप आउट होने वाली संख्या में लगभग 4.13 प्रतिशत छात्र और 4.03 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं। इसी खाई को पाटने के लिए सरकार ने माध्यमिक शिक्षा स्तर पर ‘स्कूल चलो अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है।
कक्षा 9 में नामांकन बढ़ाना मुख्य लक्ष्य
प्रदेश में वर्तमान में कक्षा 9 से 12 तक लगभग 1.07 करोड़ छात्र नामांकित हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और ऊपर ले जाना है। 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे उन बच्चों की पहचान करें जिन्होंने कक्षा 8 के बाद दाखिला नहीं लिया है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहाँ सामाजिक या आर्थिक कारणों से नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से कम है।
सामुदायिक भागीदारी और जन-जागरूकता
इस अभियान को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रखकर जन-आंदोलन बनाने की तैयारी है। इसके लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर काम किया जाएगा:
- जनप्रतिनिधियों का सहयोग: स्थानीय विधायक और सांसद इस अभियान का नेतृत्व करेंगे।
- विद्यालय प्रबंध समितियां (SMC): स्कूल स्तर पर अभिभावकों को प्रेरित करने की जिम्मेदारी प्रबंध समितियों की होगी।
- स्वयंसेवी संगठन (NGO): शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों को घर-घर जाकर सर्वे करने में शामिल किया जाएगा।
- जागरूकता रैलियां: जैसे प्राथमिक स्कूलों के लिए रैलियां निकाली जाती थीं, वैसी ही गतिविधियां अब माध्यमिक स्कूलों द्वारा भी की जाएंगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य की साक्षरता दर और उच्च शिक्षा के आधार को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। यदि 8 लाख से अधिक छात्रों को पढ़ाई छोड़ने से रोक लिया जाता है, तो यह न केवल उनके भविष्य के लिए बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कौशल विकास के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला यह सत्र यूपी की शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है।