लखनऊ

UP DGP Selection: उत्तर प्रदेश के नए ‘पुलिस मुखिया’ की तलाश तेज, शासन ने UPSC को भेजा 36 दिग्गज अफसरों का पैनल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) की स्थायी नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को आईपीएस अधिकारियों के नामों का एक विस्तृत पैनल भेज दिया है। इस पैनल में तीन दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनके अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर प्रदेश के अगले डीजीपी का चयन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के मानकों का पालन

​राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत राज्य सरकार को वरिष्ठ आईपीएस अफसरों का पैनल यूपीएससी को भेजना अनिवार्य होता है। इसी औपचारिकता को पूरा करते हुए यूपी शासन ने मंगलवार को गृह विभाग के माध्यम से सूची आयोग को सौंप दी। नियमों के मुताबिक, इस सूची में केवल उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया है जिन्होंने 30 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है।

इन बैच के अफसरों के नाम शामिल

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार ने वर्ष 1990 से लेकर 1996 बैच तक के तीन दर्जन से अधिक आईपीएस अधिकारियों के नाम आयोग को भेजे हैं। यूपीएससी इन नामों की समीक्षा करेगा और वरिष्ठता, अनुभव तथा सर्विस रिकॉर्ड (ACR) के आधार पर तीन सबसे उपयुक्त अधिकारियों का एक ‘शॉर्टलिस्टेड’ पैनल वापस राज्य सरकार को भेजेगा। अंततः, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार उन तीन नामों में से किसी एक को डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी।

वरिष्ठता सूची में कौन है सबसे आगे?

​वर्तमान में आईपीएस अफसरों की वरिष्ठता सूची (Seniority List) पर नजर डालें तो कई बड़े नाम रेस में शामिल हैं:

  1. रेणुका मिश्रा (1990 बैच): वर्तमान में डीजी के पद पर तैनात रेणुका मिश्रा का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर है।
  2. आलोक शर्मा (1991 बैच): डीजी एसपीजी (SPG) के रूप में कार्यरत आलोक शर्मा भी इस दौड़ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  3. पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में डीजी एनडीआरएफ (NDRF) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
  4. राजीव कृष्ण (वर्तमान डीजीपी): वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम भी पैनल में प्रमुखता से शामिल है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आयोग से पैनल लौटने के बाद सरकार राजीव कृष्ण के नाम पर ही दोबारा मुहर लगा सकती है।

चयन प्रक्रिया का अगला चरण

​यूपीएससी द्वारा पैनल की स्क्रूटनी के बाद राज्य सरकार को भेजी जाने वाली तीन नामों की सूची सबसे अहम होगी। सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ आगामी चुनौतियों को संभालने वाले अनुभवी चेहरे पर होगी।

​उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहाँ कानून-व्यवस्था हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहती है, डीजीपी का चयन केवल वरिष्ठता नहीं बल्कि रणनीतिक कौशल और प्रशासनिक पकड़ पर भी निर्भर करता है। शासन की ओर से भेजी गई इस सूची में 1990 से 1996 बैच के अधिकारियों को शामिल करना यह दर्शाता है कि सरकार लंबे अनुभव वाले नेतृत्व पर भरोसा करना चाहती है।

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