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Hardoi News: रविवार को उठे पेट में दर्द तो मेडिकल कॉलेज न आएं, अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाएगा

कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 11:25 PM IST

If you have stomach pain on Sunday, do not come to the medical college, ultrasound will not be possible.

हरदोई। अगर आपको रविवार या किसी सरकारी छुट्टी के दिन पेट में अचानक तेज दर्द उठता है तो मेडिकल कॉलेज जाने की गलती कतई न करें। यहां की मशीनें और सिस्टम रविवार को ताले में बंद रहते हैं। जहां एक ओर सीटी स्कैन और एक्सरे 24 घंटे जांच के लिए उपलब्ध हैं वहीं छुट्टी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से मरीज के तीमारदारों को मजबूरन निजी सेंटरों पर जाकर आर्थिक दोहन कराना पड़ रहा है।

एक ओर मेडिकल कॉलेज लगातार सुविधाओं को बेहतर करने का दावा करता आ रहा है। दूसरी ओर कई मामलों में स्थिति काफी बदहाल है। मेडिकल कॉलेज में एक्सरे और सीटी स्कैन की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है लेकिन अल्ट्रासाउंड के मामले में स्थिति विपरीत है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा सिर्फ सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक ही मिलती है। उसमें भी एक बजे के बाद नंबर नहीं लगाए जाते हैं। इसके बाद आने वाले मरीजों को अगले दिन बुलाया जाता है। वहीं, रविवार या फिर सरकारी छुट्टी के दिन अल्ट्रासाउंड विभाग बंद रहता है। यदि किसी मरीज को गंभीर स्थिति में तुरंत अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है तो डॉक्टर उसे बाहर से जांच कराने की सलाह देते हैं। निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराने में मरीजों को मनमाना शुल्क देना पड़ता है।

केस-1- आवास विकास कॉलोनी निवासी आकांक्षा के पेट में दर्द होने पर डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। चूंकि रविवार को अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका मिला। मजबूरन परिजन उन्हें निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए ले गए। वहां 900 रुपये देने पड़े।

केस-2- चंदरसीपुर सहिजना निवासी गौरी को भी पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। शनिवार को देरी से पहुंचने पर उन्हें सोमवार का नंबर दे दिया गया। उपचार के लिए उन्हें भी 1000 रुपये खर्च कर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच करानी पड़ी।

फायदा उठा रहे निजी सेंटर

इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को जब डॉक्टर तत्काल अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं तो तीमारदार कॉलेज परिसर में भटकते रह जाते हैं। आखिरकार उन्हें स्ट्रेचर या एंबुलेंस कर निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की दौड़ लगानी पड़ती है। जो जांच मेडिकल कॉलेज में मुफ्त होती है वहीं निजी सेंटरों पर इसके लिए 800 से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। तीमारदारों का कहना है कि इमरजेंसी बताकर नहीं आती। जब रविवार को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई तो डॉक्टर ने बाहर से कराने को कह दिया।

अल्ट्रासाउंड विभाग में भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। विभाग में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद व्यवस्थाएं बेहतर की जाएंगी। स्टाफ की कमी को भी पूरा किया जाएगा। इसके बाद सभी सेवाएं हर वक्त मरीजों को मिल सकेंगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

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