प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसा: ‘मौत’ का वीडियो आया सामने, एक हफ्ते पहले ही दी गई थी गैस लीकेज की चेतावनी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के फाफामऊ (चंदापुर गांव) में सोमवार को हुआ दर्दनाक कोल्ड स्टोरेज हादसा अब एक बड़ी साजिश और लापरवाही का रूप लेता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए 58 सेकंड के एक वीडियो ने प्रशासन और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
वीडियो में दिखा तबाही का मंजर
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि इमारत गिरने से कुछ सेकंड पहले ही वह बुरी तरह हिल रही थी। वहां मौजूद लोग चिल्ला रहे थे कि “बिल्डिंग गिरने वाली है।” हैरानी की बात यह है कि जब स्थिति इतनी भयावह थी, तो अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकालने का प्रयास क्यों नहीं किया गया? पुलिस अब इस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है।
एक हफ्ते पहले दी थी लीकेज की सूचना
हादसे में जान गंवाने वाले ऑपरेटर जगदीश की पत्नी साधना देवी ने फूट-फूट कर बताया कि उनके पति पिछले तीन दिनों से तनाव में थे। जगदीश ने बताया था कि कोल्ड स्टोर की अमोनिया गैस टंकी में लीकेज हो रहा है। उन्होंने इसकी जानकारी मुंशी राम मूरत को भी दी थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे हल्के में लिया। दो दिन पहले एक मैकेनिक आया तो जरूर, लेकिन बिना मरम्मत किए ही लौट गया। यह लापरवाही ही जगदीश के परिवार के उजड़ने का कारण बनी।
सत्ता और प्रशासन पर गिरी गाज
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और सपा नेता पूर्व मंत्री अंसार अहमद, उनके बेटे मंजूर और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है।
राहत कार्य और किसानों का नुकसान
प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने घटनास्थल का दौरा कर स्पष्ट किया कि किसानों के हुए नुकसान की भरपाई कोल्ड स्टोर संचालक को ही करनी होगी। मलबे में दबी हजारों आलू की बोरियां बर्बाद हो चुकी हैं। फिलहाल एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
मुख्य बिंदु और खुलासे:
- एफआईआर: अंसार अहमद समेत 7 नामजद और 5 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज।
- लापता आरोपी: ठेकेदार बलबीर यादव और मुंशी अजीत अभी भी फरार हैं, जिससे मजदूरों के परिजनों को अपनों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
- जांच समिति: संयुक्त निदेशक उद्यान के नेतृत्व में 3 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
- सुरक्षा मानक: प्रदेश के सभी कोल्ड स्टोरेज की सुरक्षा और मानकों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन मजदूरों की ‘हत्या’ है जिन्हें पता था कि वे मौत के साये में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। अब देखना यह है कि क्या दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए मिसाल बने?