चित्रकूट दीपदान विवाद: पूर्व सांसद ने भगवान कामतानाथ को लिखा पत्र, लगाए गंभीर आरोप
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश: धर्मनगरी चित्रकूट में रामनवमी और चित्रकूट गौरव दिवस के अवसर पर 22 लाख दीपदान के सरकारी दावे ने अब एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस दावे की सत्यता पर सवाल उठाते हुए भाजपा के पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने सीधे भगवान कामतानाथ को एक मार्मिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आयोजकों और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मिश्रा ने इसे आस्था का अपमान और जनता के साथ धोखा बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
रामनवमी और चित्रकूट गौरव दिवस के पावन अवसर पर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चित्रकूट जिला प्रशासन ने मिलकर रामघाट पर भव्य दीपदान का आयोजन किया था। प्रशासन का दावा था कि इस आयोजन में कुल 22 लाख दीपक प्रज्वलित किए गए, जिससे एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ। इस आयोजन को लेकर तैयारियां भी जोरों पर थीं और बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया गया था।
पूर्व सांसद ने उठाए सवाल
दीपदान के भव्य आयोजन और उसके बाद किए गए 22 लाख दीप प्रज्वलन के सरकारी दावे के तुरंत बाद, भाजपा के पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने इस आंकड़े पर सवाल उठा दिए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस दावे को गलत बताया और आयोजन में हुई कथित अनियमितताओं पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। मिश्रा का कहना है कि जिस तरह से दीपदान का दावा किया गया है, वह हकीकत से परे है और यह धार्मिक आयोजनों की पवित्रता के साथ खिलवाड़ है।
भगवान कामतानाथ को लिखा पत्र
इस घटना से आहत होकर, भैरों प्रसाद मिश्रा ने एक अनूठा कदम उठाते हुए सीधे भगवान कामतानाथ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की है और उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि किस प्रकार इस झूठे दावे से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है और यह भगवान के धाम में एक तरह का छल है।
मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा है, “हे प्रभु कामतानाथ, आपकी पावन नगरी में रामनवमी और चित्रकूट गौरव दिवस के अवसर पर हुए दीपदान को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, वे वास्तविकता से कोसों दूर हैं। 22 लाख दीपों का दावा कर प्रशासन ने न केवल जनता को गुमराह किया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का भी अपमान किया है।” उन्होंने आगे लिखा, “यह कृत्य केवल एक संख्या का हेरफेर नहीं, बल्कि धर्म और भक्ति के नाम पर किया गया एक बड़ा धोखा है। मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप इन दोषियों को सद्बुद्धि दें और उन्हें उनके इस पाप कर्म का उचित दंड दें।”
आस्था का अपमान और जनता के साथ धोखा
पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा है कि इस तरह के झूठे दावे करके प्रशासन ने न केवल अपनी विश्वसनीयता खोई है, बल्कि जनता के साथ भी विश्वासघात किया है। उनके अनुसार, चित्रकूट जैसे पवित्र स्थान पर, जहां हर कण में भगवान राम का वास माना जाता है, ऐसे पावन अवसरों पर झूठ और फरेब का सहारा लेना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कृत्य से धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचती है और श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगाता है।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
भैरों प्रसाद मिश्रा ने अपने पत्र और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जो भी अधिकारी या व्यक्ति इस दीपदान के आंकड़ों में हेरफेर के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी धर्म और आस्था के नाम पर ऐसे झूठे दावे करने की हिमाकत न कर सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे आयोजनों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उचित तंत्र विकसित किए जाने चाहिए।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद पर दोनों राज्यों की सरकारें और संबंधित प्रशासन क्या प्रतिक्रिया देते हैं। पूर्व सांसद के इस अनूठे विरोध ने निश्चित रूप से इस मामले को एक नई दिशा दी है और यह चित्रकूट के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।