आगरा: एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रताड़ना का आरोप, महिला कोच अस्पताल में भर्ती; खेल विभाग में मचा हड़कंप
आगरा: ताजनगरी के प्रतिष्ठित एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में चल रहा विभागीय विवाद अब एक गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। क्षेत्रीय खेल कार्यालय में तैनात कबड्डी की सहायक प्रशिक्षिका और आवासीय छात्रावास की वार्डन विजय लक्ष्मी सिंह को मानसिक तनाव और तबीयत बिगड़ने के कारण शनिवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस घटना ने खेल विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व सम्मान पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेस में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप
विजय लक्ष्मी सिंह ने अस्पताल जाने से पहले खेल निदेशक को भेजे अपने स्पष्टीकरण पत्र में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेडियम के छात्रावास की मेस (Mess) व्यवस्था में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
- मेन्यु का उल्लंघन: खिलाड़ियों को तय मेन्यु के अनुसार पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा है।
- अनुशासनहीनता: मेस कर्मचारियों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
- मानसिक उत्पीड़न: जब उन्होंने इन कमियों को सुधारने की कोशिश की, तो उन्हें चुप रहने के लिए दबाव बनाया गया और बार-बार नोटिस देकर प्रताड़ित किया गया।
’हटाने के लिए रचा जा रहा षड्यंत्र’
महिला कोच का आरोप है कि उन्हें वार्डन के पद से हटाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की बाल विकास मंत्री बेबीरानी मौर्या और खेल निदेशक आरपी सिंह को भी पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा और मेस में हो रही गड़बड़ियों की शिकायत की थी। उनका कहना है कि सच बोलने की सजा उन्हें मानसिक प्रताड़ना के रूप में दी जा रही है।
पुराना है विवादों का नाता
एकलव्य स्टेडियम के लिए यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी यहाँ महिला प्रशिक्षकों और वार्डन के स्थानांतरण और आपसी विवादों की खबरें सुर्खियों में रही हैं। खेल विभाग की इस छवि से न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि दूर-दराज से आए खिलाड़ियों की सुविधाओं और सुरक्षा पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
विभागीय पक्ष: आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी (RSO) संजय शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा:
”अगर विजय लक्ष्मी को कोई समस्या थी, तो उन्हें सीधे मुझसे बात करनी चाहिए थी। उन्होंने मुझसे संपर्क नहीं किया और सीधे मंत्री व खेल निदेशक से झूठी शिकायतें कर रही हैं।”
फिलहाल, महिला कोच का अस्पताल में इलाज जारी है, लेकिन इस घटना ने आगरा के खेल जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या खिलाड़ियों के निवाले में सचमुच कटौती की जा रही है? और क्या विभाग में सच बोलने वाली महिला अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब शासन स्तर की जांच ही दे पाएगी।