आगरा में खपाया जा रहा राजस्थान का ‘सफेद जहर’: सहालग में 8 हजार क्विंटल नकली दूध-पनीर बरामद, प्रशासन अलर्ट
आगरा। ताजनगरी आगरा और आसपास के जिलों में इन दिनों शादियों (सहालग) की धूम है। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच आपकी सेहत पर एक बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से उत्तर प्रदेश में भारी मात्रा में नकली दूध, खोआ और पनीर की सप्लाई की जा रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य विभाग ने अब तक करीब 8,000 क्विंटल मिलावटी खाद्य सामग्री पकड़कर नष्ट की है।
सीमा पर सुरक्षा सख्त, माफियाओं में हड़कंप
आगरा प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने राजस्थान से सटे बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है। सहायक आयुक्त खाद्य (द्वितीय) महेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। विभाग को सूचना मिली थी कि मांग बढ़ने के कारण राजस्थान के धौलपुर, राजाखेड़ा और मुरैना जैसे इलाकों से नकली माल ट्रकों और निजी वाहनों के जरिए आगरा लाया जा रहा है।
हाल ही में धौलपुर से आगरा आ रहे 1,200 लीटर सिंथेटिक दूध को पकड़ा गया, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। यह दूध पूरी तरह रसायनों से तैयार किया गया था, जो मानव शरीर के लिए बेहद घातक है।
कैसे बनता है यह ‘जहरीला’ माल?
पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मिलावटखोर ‘ऑन डिमांड’ माल तैयार करते हैं।
- सिंथेटिक दूध: इसमें यूरिया, डिटर्जेंट और घटिया क्वालिटी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
- नकली पनीर और खोआ: दूध की चिकनाई बढ़ाने के लिए इसमें रिफाइंड तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाया जाता है। कई मामलों में तो सफेद चाक और भारी मात्रा में स्टार्च का प्रयोग भी सामने आया है।
- सप्लाई चेन: यह मिलावटी माल केवल आगरा तक सीमित नहीं है, बल्कि फिरोजाबाद, मथुरा, एटा और हाथरस जैसे जिलों में भी खपाया जा रहा है।
पिछला रिकॉर्ड: त्योहारों पर भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान से इस तरह की खेप पकड़ी गई हो। पिछले साल 5 दिसंबर को कुबेरपुर टोल प्लाजा पर 840 किलो मिलावटी पनीर बरामद किया गया था। वहीं, इस साल 28 फरवरी को धौलपुर से आ रहे 1,320 किलो नकली खोआ को पकड़ा गया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 महीनों में पकड़े गए 8 हजार क्विंटल माल की कीमत करोड़ों में आंकी गई है।
सहालग में बढ़ी मांग का फायदा उठा रहे माफिया
शादियों के सीजन में दूध और मावे की खपत सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना बढ़ जाती है। हलवाइयों और कैटरर्स को सस्ते दाम का लालच देकर यह माफिया अपनी जड़ें जमा लेते हैं। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल बॉर्डर ही नहीं, बल्कि शहर के भीतर मौजूद डेयरियों और मिठाई की दुकानों पर भी सैंपलिंग तेज कर दी गई है।
आम जनता के लिए चेतावनी और सलाह
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे जागरूक बनें और किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री की सूचना तुरंत विभाग को दें।
मिलावटी पनीर और खोआ को कैसे पहचानें?
- पनीर: थोड़ा सा टुकड़ा हाथ में मसल कर देखें, अगर वह बिखरने लगे तो उसमें मिलावट हो सकती है। आयोडीन टिंचर डालने पर अगर पनीर नीला पड़ जाए, तो उसमें स्टार्च है।
- खोआ: इसे चखकर देखें, अगर यह दांतों में चिपके तो समझ लें कि यह शुद्ध नहीं है।
- दूध: दूध को उबाले जाने पर अगर उसका रंग हल्का पीला हो जाए, तो वह असली है। लेकिन अगर वह सफेद ही रहे या कड़वा लगे, तो वह सिंथेटिक हो सकता है।
निष्कर्ष
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस बड़ी कार्रवाई ने निश्चित रूप से मिलावटखोरों की कमर तोड़ी है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। आगरा की सीमा पर तैनात टीमें हर संदिग्ध वाहन की तलाशी ले रही हैं। यदि आप भी किसी शादी समारोह में जा रहे हैं या घर के लिए खरीदारी कर रहे हैं, तो सतर्क रहें क्योंकि आपकी थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए महंगी पड़ सकती है।