UP: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने किया शांति मार्च का भव्य स्वागत, बोले— ‘दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध की जरूरत’
लखनऊ। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया अस्थिरता और युद्ध की विभीषिका से जूझ रही है, ऐसे में शांति और अहिंसा का संदेश भारत की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर गूंजा। सोमवार को बौद्ध भिक्षुओं और भंतेगणों द्वारा आयोजित एक भव्य ‘शांति मार्च’ का समापन उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर हुआ। इस अवसर पर डिप्टी सीएम ने न केवल मार्च का स्वागत किया, बल्कि भगवान बुद्ध के उपदेशों को आधुनिक युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
शांति मार्च का मार्ग और आयोजन
यह शांति मार्च डॉ. अंबेडकर महासभा कार्यालय, विधानसभा मार्ग से अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुआ। हजरतगंज चौराहा होते हुए यह मार्च उप मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग पहुंचा। मार्च में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, भंते, टी.डी. गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सफेद और चीवर वस्त्रों में सजे भिक्षुओं ने ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
डिप्टी सीएम ने किया भंतेगणों का अभिनंदन
कैंप कार्यालय पहुंचने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सभी बौद्ध भिक्षुओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी पूज्य भंतेगणों को ‘अंगवस्त्र’ भेंट कर सम्मानित किया। मौर्य ने कहा कि संतों और भिक्षुओं का उनके द्वार पर आना सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारे और शांति का संदेश जाता है।
“भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं”
अपने संबोधन के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक शांति के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से स्पष्ट कहा था कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि बुद्ध दिया है। आज जब कई देश आपस में लड़ रहे हैं, तब बुद्ध की करुणा और मैत्री ही मानवता को बचा सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “विश्व एक परिवार है” (वसुधैव कुटुंबकम) और शांति हमारा सबसे बड़ा अस्त्र है। उनके अनुसार, शांति का एकमात्र शाश्वत मार्ग भगवान बुद्ध के चरणों में ही मिलता है।
सम्राट अशोक और रूस यात्रा का जिक्र
उप मुख्यमंत्री ने महान सम्राट अशोक के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ही बुद्ध के संदेशों को वैश्विक पहचान दिलाई। मौर्य ने अपने एक व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर उन्हें बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को रूस के काल्मिकिया ले जाने का अवसर मिला था। वहां लाखों लोगों की श्रद्धा देखकर यह सिद्ध हो गया कि बुद्ध की शिक्षाएं सीमाओं में नहीं बंधी हैं।
विरासत और विकास का संगम
उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि ‘डबल इंजन’ की सरकार “विरासत और विकास” के मंत्र पर चल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा:
- जिस प्रकार अयोध्या, काशी और मथुरा का कायाकल्प हो रहा है, उसी प्रकार बौद्ध सर्किट के केंद्रों का भी विकास किया जा रहा है।
- सारनाथ, कुशीनगर और संकिसा जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों पर बुनियादी ढांचे और पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।
- सरकार का लक्ष्य है कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायी उत्तर प्रदेश में सुगमता से दर्शन कर सकें।
बाबा साहब और सामाजिक न्याय
इस कार्यक्रम के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने भगवान बुद्ध के धम्म को अपनाकर सामाजिक समता और न्याय का जो मार्ग दिखाया था, सरकार उसी पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है।
अन्य वक्ताओं के विचार
उत्तर प्रदेश अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि प्रदेश सरकार बुद्ध विहारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भंते शीलरतन ने आह्वान किया कि समाज को घृणा त्याग कर करुणा को अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष
लखनऊ में आयोजित यह शांति मार्च केवल एक प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह दुनिया को भारत की ओर से दिया गया एक कड़ा संदेश था। केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में हुए इस स्वागत समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि विकास की दौड़ में भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत और शांति के मूल्यों को कभी पीछे नहीं छोड़ेगा।