Agra: इलाज में लापरवाही से मासूम की मौत! पीली सेना ने घेरा अस्पताल, दी ताला लगाने की चेतावनी
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही और उसके खिलाफ जनता के आक्रोश का एक गंभीर मामला सामने आया है। थाना ताजगंज क्षेत्र स्थित डॉ. मोहनिया मेटेरनिटी अस्पताल में एक मासूम बच्चे की मौत के बाद हड़कंप मच गया। इस घटना से नाराज ‘पीली सेना’ की कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में जमकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के लिए चेतावनी दी।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 27 मार्च को हुई थी। शहीद नगर निवासी सलमान ने अपने मासूम बेटे उरहान के पेट में दर्द होने की शिकायत के बाद उसे डॉ. हरेंद्र मोहनिया के अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों और पीली सेना का आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे को ‘हैवी डोज’ का इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
सबूत मिटाने और परिजनों को धमकाने का आरोप
पीली सेना की अध्यक्ष शबाना खंडेलवाल ने अस्पताल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही बच्चे की मौत हुई, अस्पताल स्टाफ ने आनन-फानन में उसे दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। आरोप है कि इस दौरान अस्पताल ने बच्चे के इलाज से जुड़ी फाइलें, दवाइयां और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब कर दिए ताकि लापरवाही का कोई सबूत न बचे।
यही नहीं, परिजनों का यह भी कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया और कहा गया कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।
पुलिस रिपोर्ट और प्रदर्शनकारियों का विरोध
इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बच्चे की मौत का कारण ‘दौरे पड़ना’ बताया है, जबकि परिजनों का दावा है कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था और उसे केवल पेट दर्द की शिकायत थी।
न्याय न मिलने से क्षुब्ध होकर सोमवार को पीली सेना की अध्यक्ष शबाना खंडेलवाल अपने कार्यकर्ताओं और मृतक बच्चे के परिजनों के साथ डॉ. मोहनिया अस्पताल पहुंचीं। वहां उन्होंने गेट पर जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का आक्रोश देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
अस्पताल में ताला लगाने की दी धमकी
प्रदर्शन के दौरान शबाना खंडेलवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में दोषी डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो पीली सेना स्वयं आकर अस्पताल के गेट पर ताला लगा देगी। उन्होंने अस्पताल के लाइसेंस को निरस्त करने की भी मांग की है।
पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। फिलहाल, क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
निष्कर्ष
आगरा की यह घटना चिकित्सा जगत की नैतिकता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल पर सबूत मिटाने के संगीन आरोप हैं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।