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कानपुर: मतदाता सूची से 9.23 लाख नाम हटने पर बड़ा विवाद, क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?

कानपुर: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में इन दिनों सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। इसका कारण कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी की गई अंतिम मतदाता सूची है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने न केवल आम जनता को बल्कि राजनीतिक दलों को भी अचंभे में डाल दिया है। जिले की मतदाता सूची से कुल 9.23 लाख मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं, जिससे आगामी चुनावों के समीकरण पूरी तरह बदलने की आशंका जताई जा रही है।

आंकड़ों का खेल: भारी गिरावट ने चौंकाया

​SIR अभियान से पहले कानपुर जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 35.38 लाख थी, जो अब घटकर मात्र 26.36 लाख रह गई है। इस भारी कटौती में पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों के वोटर्स प्रभावित हुए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, वर्तमान में जिले में:

  • पुरुष मतदाता: 15.35 लाख (लगभग 58%)
  • महिला मतदाता: 13.15 लाख (लगभग 42%)
  • अन्य: 110

​सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कानपुर की हाई-प्रोफाइल सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या में जबरदस्त गिरावट देखी गई है।

महिला मतदाताओं की संख्या में भारी सेंध

​कल्याणपुर, गोविंदनगर, छावनी और महाराजपुर जैसी विधानसभाओं में महिला वोटर्स की संख्या में 40-40 हजार से अधिक की कमी आई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • कल्याणपुर: 47,393 महिला वोटर्स कम हुईं।
  • गोविंदनगर: 46,623 महिलाओं के नाम कटे।
  • छावनी: 44,791 महिलाएं लिस्ट से बाहर।
  • महाराजपुर: 40,095 महिला वोटर्स घटीं।

​यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि राजनीतिक दल अक्सर महिला वोट बैंक को साधने के लिए विशेष रणनीतियां बनाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से ‘आधी आबादी’ के प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुरुष मतदाताओं के भी कटे हजारों नाम

​सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष मतदाताओं की सूची में भी भारी छंटनी हुई है। छावनी विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 56,788 पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं, गोविंदनगर से 53,527, कल्याणपुर से 52,412 और आर्य नगर से 45,857 पुरुष वोटर्स अब सूची का हिस्सा नहीं हैं।

फॉर्म-6 भरने के बाद भी नाम गायब: जनता में आक्रोश

​इस पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल जनता की शिकायतों से खड़ा हुआ है। शहर के कई इलाकों से ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ लोगों ने नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 भरा था, दस्तावेज़ जमा किए थे, फिर भी उनका नाम अंतिम सूची में नहीं है।

  • आर्य नगर के हीरामनका निवासी जुबैर अहमद ने बताया कि उन्होंने बीएलओ (BLO) को सभी आवश्यक कागजात दिए थे, लेकिन उनका नाम लिस्ट में नहीं आया। अब उन्हें फिर से फॉर्म भरने को कहा जा रहा है।
  • जाजमऊ और अजीतगंज के वार्डों से भी दर्जनों ऐसी शिकायतें मिली हैं जहाँ स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जो लोग 15 साल से क्षेत्र छोड़ चुके हैं, उनके नाम तो लिस्ट में हैं, लेकिन वर्तमान में रह रहे लोगों के नाम गायब कर दिए गए हैं।

राजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता

​9 लाख से ज्यादा वोटर्स का कम होना किसी भी चुनाव के नतीजे को पलटने के लिए काफी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी कटौती से ‘वोट शेयर’ पर सीधा असर पड़ेगा। विपक्षी दल इस मुद्दे को प्रशासन की लापरवाही बता रहे हैं, वहीं निर्वाचन विभाग का तर्क है कि यह प्रक्रिया सूची को शुद्ध (Purification) करने के लिए की गई है ताकि फर्जी और डुप्लीकेट वोटर्स को हटाया जा सके।

निष्कर्ष: क्या होगा अगला कदम?

​वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्वाचन कार्यालय पर भारी दबाव है। जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उनके पास अभी भी अवसर है कि वे निर्वाचन आयोग के पोर्टल या अपने बीएलओ के माध्यम से पुनः आवेदन करें। हालांकि, इतनी बड़ी विसंगति के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा करता है या नहीं। कानपुर की जनता के लिए यह ‘लोकतंत्र के पर्व’ से पहले अपनी पहचान बचाने की लड़ाई बन गई है।

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