कानपुर SAF का धमाका: जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिली स्वदेशी पिस्टल की मारक शक्ति, उत्पादन में बनाया नया कीर्तिमान
उत्तर प्रदेश का औद्योगिक हब कानपुर एक बार फिर रक्षा क्षेत्र में अपनी धाक जमा रहा है। रक्षा गलियारे (Defense Corridor) के रूप में उभरते कानपुर की लघु शस्त्र निर्माणी (SAF), जो कि ‘एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड’ की एक प्रमुख इकाई है, ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। हाल ही में संस्थान ने न केवल रिकॉर्ड उत्पादन किया है, बल्कि जम्मू-कश्मीर पुलिस जैसे संवेदनशील सुरक्षा बल को अपनी अत्याधुनिक पिस्टल की पहली खेप भी सौंपी है।
वित्त वर्ष 2025-26: उत्पादन का ऐतिहासिक शिखर
लघु शस्त्र निर्माणी कानपुर ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 327 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के 256 करोड़ रुपये के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है।
लगातार तीसरे वर्ष उत्पादन में वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्माणी के पास वर्तमान में 900 करोड़ रुपये की विशाल ऑर्डर बुक है, जो वित्त वर्ष 2027-28 तक के लिए सुरक्षित है। अकेले चालू वर्ष में ही संस्थान को 325 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिली नई ताकत
आतंकवाद विरोधी अभियानों और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चर्चित जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कानपुर में बनी 9×19 mm पिस्टल पर भरोसा जताया है। इस अत्याधुनिक पिस्टल की पहली खेप डिलीवर कर दी गई है। इसके साथ ही, सुरक्षा बलों को ‘बेल्ट फेड मशीन गन’ की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई है।
केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि असम राइफल्स, छत्तीसगढ़ पुलिस और चंडीगढ़ पुलिस जैसे बलों ने भी इस पिस्टल की मांग की है। इसके अतिरिक्त, जबलपुर स्थित सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो (COD) को 94.11 करोड़ रुपये की लागत वाली 7.62 mm कैलिबर मैग गन की आपूर्ति भी की गई है।
9×19 mm पिस्टल की तकनीकी विशेषताएं
यह पिस्टल न केवल हल्की है, बल्कि इसकी मारक क्षमता और मैकेनिज्म इसे वैश्विक मानकों के बराबर खड़ा करता है। नीचे इसकी प्रमुख विशेषताएं दी गई हैं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कैलिबर | 9 x 19 एमएम |
| मारक क्षमता | 100 मीटर (प्रभावी रेंज) |
| मैकेनिज्म | सिंगल शॉट और ऑटो मोड दोनों उपलब्ध |
| वजन | 2.38 किलोग्राम से कम (बेहद हल्की) |
| लंबाई | विस्तारित 608±5 mm, मोड़ी हुई 373±5 mm |
| मैगजीन क्षमता | 30 राउंड |
| फायर की दर | 800 राउंड प्रति मिनट |
| परिचालन तापमान | -20°C से 45°C (लेह से राजस्थान तक सक्षम) |
क्यों खास है यह पिस्टल?
- दोहरा मोड (Dual Mode): यह पिस्टल सिंगल शॉट के साथ-साथ ऑटो मोड में भी काम कर सकती है, जो इसे क्लोज कॉम्बैट (करीबी लड़ाई) में बेहद घातक बनाता है।
- सहनशीलता: इसका डिजाइन ऐसा है कि यह भीषण ठंड (-20 डिग्री) और अत्यधिक गर्मी (45 डिग्री) में भी बिना जाम हुए काम करती है।
- हल्की और पोर्टेबल: मात्र 2.38 किलो से कम वजन होने के कारण सुरक्षा बलों के लिए इसे ले जाना और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस्तेमाल करना आसान है।
- हाई फायर रेट: 800 राउंड प्रति मिनट की दर इसे एक सब-मशीन गन जैसी शक्ति प्रदान करती है।
महाप्रबंधक सुरेंद्रपति का बयान
निर्माणी के महाप्रबंधक सुरेंद्रपति ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह हमारे कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और स्वदेशी तकनीक का परिणाम है। उन्होंने पुष्टि की कि न केवल जम्मू-कश्मीर पुलिस बल्कि देश के कई अन्य अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस बलों से भी हमें बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं।
निष्कर्ष
कानपुर की लघु शस्त्र निर्माणी की यह सफलता भारत के रक्षा निर्यात और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 900 करोड़ के आगामी ऑर्डर्स यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाले वर्षों में कानपुर रक्षा उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनकर उभरेगा। स्वदेशी हथियारों का यह बढ़ता वर्चस्व न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को भी साकार कर रहा है।