परशुराम महोत्सव: कानपुर गंगा किनारे 101 बटुकों ने धारण किया जनेऊ, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा तट
कानपुर में गंगा तट पर आयोजित परशुराम महोत्सव के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
भगवान परशुराम को समर्पित इस आयोजन में 101 बटुकों ने विधिवत जनेऊ (उपनयन संस्कार) धारण किया।सुबह से ही गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी।
आचार्यों के निर्देशन में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ यज्ञ और उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। बटुकों ने मंत्रोच्चार के बीच यज्ञोपवीत धारण किया, जिससे पूरा घाट वेद मंत्रों की ध्वनि से गूंज उठा।उपनयन संस्कार को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है,
जिसके माध्यम से बालक को आध्यात्मिक जीवन और शिक्षा के मार्ग पर अग्रसर किया जाता है। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने बताया कि यह परंपरा वैदिक संस्कृति की मूल पहचान है
और इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना है।कार्यक्रम में संत-महात्माओं और समाज के गणमान्य लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना बढ़ती है
और युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।गंगा तट पर दीप, हवन और मंत्रोच्चार के बीच बना आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
पूरे आयोजन ने आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
