वाराणसी

BHU: पीजी और पीएचडी छात्रों के लिए 50 लाख की नई स्कॉलरशिप का ऐलान, अमेरिका फाउंडेशन के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता

BHU New Scholarship Update: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर अपने छात्रों के शैक्षणिक विकास और अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देने के लिए चर्चा में है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परास्नातक (PG) और पीएचडी (PhD) के छात्रों के लिए 50 लाख रुपये की स्कॉलरशिप और रिसर्च फंड की एक नई योजना की घोषणा की है। यह पहल अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों और ‘बीएचयू अमेरिका फाउंडेशन’ के सहयोग से संभव हुई है।

बायो केमिस्ट्री विभाग को मिलेगा सीधा लाभ

​विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह स्कॉलरशिप राशि विशेष रूप से बायो केमिस्ट्री विभाग (Department of Biochemistry) को आवंटित की जाएगी। मंगलवार को हुए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बीएचयू प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

पूर्व छात्रों का अपनी मातृसंस्था को उपहार

​इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें सहयोग करने वाले वैज्ञानिक डॉ. निर्भय कुमार और डॉ. गीता पी. बंसल बीएचयू के ही पूर्व छात्र रहे हैं। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेरिया प्रतिरक्षा और बायो मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले इन वैज्ञानिकों ने अपनी मातृसंस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह अनुदान दिया है।

स्कॉलरशिप और फंड का वितरण: मुख्य बिंदु

​समझौते को दो चरणों में लागू किया जाएगा, जिसका विवरण इस प्रकार है:

1. पहला चरण (वर्ष 2026):

  • ​अगले साल से 25 लाख रुपये की राशि प्राप्त होगी।
  • ​इसका उपयोग एमएससी बायो केमिस्ट्री के दूसरे वर्ष के छात्रों के लिए किया जाएगा।
  • ​हर साल 25,000 रुपये की 5 स्कॉलरशिप दी जाएंगी।
  • ​चयन का आधार मेरिट (योग्यता) और छात्र की आर्थिक स्थिति होगी।

2. दूसरा चरण (वर्ष 2027):

  • ​वर्ष 2027 में 25 लाख रुपये की दूसरी किस्त जारी की जाएगी।
  • ​इस फंड का उपयोग पीजी छात्रों के साथ-साथ शोधार्थियों (PhD Scholars) को स्कॉलरशिप और रिसर्च प्रोत्साहन राशि देने के लिए किया जाएगा।

कुलपति का संवाद पर जोर

​बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को अपने पूर्व छात्रों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग नियमित रूप से पुराने छात्रों और सहयोगकर्ताओं के संपर्क में रहें, ताकि विश्वविद्यालय के विकास में उनकी विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ मिल सके।

शैक्षिक जगत में अन्य महत्वपूर्ण समझौते

​इसी दौरान वाराणसी के शैक्षणिक क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। डीएवी पीजी कॉलेज (DAV PG College) और श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय पीजी कॉलेज, भदोही के बीच भी एक एमओयू (MoU) हुआ है।

  • उद्देश्य: दोनों संस्थान शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे।
  • हस्ताक्षर: डीएवी के प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल और भदोही कॉलेज की प्राचार्य प्रो. माया ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • ​यह समझौता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और दोनों कॉलेजों के बीच संसाधनों के साझाकरण को बढ़ावा देगा।

छात्रों के लिए क्या हैं अवसर?

​यह स्कॉलरशिप उन मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी रिसर्च या उच्च शिक्षा को बीच में छोड़ने पर विचार करते हैं। बायो मेडिकल रिसर्च, इंडस्ट्री और बौद्धिक संपदा (IP) के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए डॉ. गीता पी. बंसल का सहयोग मार्गदर्शन का भी काम करेगा।

निष्कर्ष

​बीएचयू में अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों का जुड़ाव और भारी-भरकम स्कॉलरशिप की घोषणा यह दर्शाती है कि विश्वविद्यालय वैश्विक पटल पर अपनी रैंकिंग सुधारने और छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। 2026 से शुरू होने वाली यह योजना बायो केमिस्ट्री के क्षेत्र में नए शोध के रास्ते खोलेगी।

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