दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का बड़ा एक्शन: फर्जी ‘नो एंट्री परमिट’ लगाकर सड़कों पर दौड़ रहे वाहन जब्त, 3 FIR दर्ज
नई दिल्ली। देश की राजधानी में कानून व्यवस्था और यातायात नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे वाहन चलाने वालों के खिलाफ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपना शिकंजा कस दिया है। नई दिल्ली रेंज ट्रैफिक पुलिस ने एक विशेष अभियान के दौरान तीन ऐसे वाहनों को पकड़ा है, जो जाली नो एंट्री परमिट (NEP) और इंजन-चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ कर चलाए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने तीन अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।
धोखाधड़ी के खिलाफ विशेष अभियान
नई दिल्ली रेंज के पुलिस उपायुक्त (DCP) शोभित सक्सेना के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस लगातार जालसाजी और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सतर्कता बरत रही है। इसी कड़ी में 26 और 27 अप्रैल को सघन चेकिंग के दौरान ये मामले सामने आए। पुलिस ने न केवल वाहनों को जब्त किया है, बल्कि इन फर्जी दस्तावेजों के पीछे सक्रिय सिंडिकेट की भी जांच शुरू कर दी है।
मामला 1: पटियाला हाउस कोर्ट के पास पकड़ी गई जाली परमिट
27 अप्रैल की शाम करीब 5:15 बजे, पटियाला हाउस कोर्ट के पास तैनात एएसआई राजेंदर कुमार और उनकी टीम ने एक दिल्ली नंबर के वाहन को संदेह के आधार पर रोका। जब वाहन पर लगे नो एंट्री परमिट (NEP) की जांच ई-चालान मशीन से की गई, तो वह सिस्टम में जाली पाया गया।
- ड्राइवर: वीर पाल (21 वर्ष), निवासी हमीरपुर, यूपी।
- वाहन मालिक: कपिल देव, निवासी किराड़ी। पुलिस ने बताया कि आरोपी जाली परमिट को असली की तरह इस्तेमाल कर रहा था। वाहन को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है।
मामला 2: 12,000 रुपये में खरीदा था फर्जी परमिट
एक अन्य मामले में, 27 अप्रैल की रात करीब 10 बजे शंकर चौक पर चेकिंग के दौरान एएसआई राज कुमार ने एक कमर्शियल वाहन को रोका। जांच में पता चला कि वाहन पर लगा परमिट किसी दूसरे वाहन के नाम पर जारी किया गया था और उसे इस गाड़ी के लिए ‘क्लोन’ किया गया था।
- ड्राइवर: राहुल शुक्ला (29 वर्ष), निवासी शास्त्री पार्क, दिल्ली।
- खुलासा: पूछताछ में ड्राइवर ने कबूल किया कि उसने यह फर्जी परमिट संजय नाम के एक व्यक्ति से 12,000 रुपये में खरीदा था। इस मामले की जांच मंदिर मार्ग थाना पुलिस कर रही है।
मामला 3: कनॉट प्लेस में पकड़ा गया ‘टैम्पर्ड’ ऑटो-रिक्शा
तीसरा मामला 26 अप्रैल का है, जब कनॉट प्लेस में काके दा ढाबा के पास एएसआई वीरेंद्र सिंह ने नियमित जांच के दौरान एक ऑटो-रिक्शा को रोका। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे:
- ऑटो के चेसिस और इंजन नंबर रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे।
- वाहन पर लगी नंबर प्लेट भी फर्जी पाई गई। इससे साफ जाहिर हुआ कि वाहन के साथ बड़ी स्तर पर छेड़छाड़ की गई थी, जो सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर अपराध है।
नो एंट्री परमिट (NEP) का खेल और पुलिस की चुनौती
दिल्ली में भारी वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों के प्रवेश के लिए समय सीमा निर्धारित है। इस ‘नो एंट्री’ क्षेत्र में प्रवेश के लिए विशेष परमिट (NEP) की आवश्यकता होती है। जालसाज मोटी रकम लेकर इन परमिटों की हुबहू नकल तैयार करते हैं, जिससे राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में भी सेंध लगती है।
ट्रैफिक पुलिस की अपील
पुलिस उपायुक्त ने वाहन मालिकों और ड्राइवरों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति से परमिट न खरीदें। ई-चालान मशीनों और डिजिटल डेटाबेस की मदद से अब फर्जीवाड़े को पकड़ना बहुत आसान हो गया है। ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
- कार्रवाई स्थल: पटियाला हाउस कोर्ट, शंकर चौक, कनॉट प्लेस।
- दर्ज FIR: 3 अलग-अलग थानों (तिलक मार्ग, मंदिर मार्ग आदि) में।
- मुख्य आरोपी: ड्राइवर और फर्जी परमिट बेचने वाले गिरोह।
- तकनीकी जांच: ई-चालान मशीन और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए खुलासा।