कानपुर: दबंगों ने जेसीबी से उजाड़ दिए मनरेगा के सैकड़ों पौधे, ग्राम प्रधान से भिड़े आरोपी; पुलिस महकमे में खलबली
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी योजना और पर्यावरण को खुलेआम चुनौती दी गई है। महाराजपुर थाना क्षेत्र के सिकठिया गांव में दबंगों ने मनरेगा (MGNREGA) के तहत लगाए गए सैकड़ों हरे-भरे पौधों को जेसीबी मशीन चलाकर नष्ट कर दिया। जब ग्राम प्रधान ने इस सरकारी संपत्ति के नुकसान का विरोध किया, तो आरोपी उनके साथ मारपीट पर उतारू हो गए।
क्या है पूरा मामला?
सिकठिया गांव के ग्राम प्रधान आकाश सिंह ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि गांव के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया था। इनमें शीशम, नीम और बबूल जैसे महत्वपूर्ण प्रजातियों के पौधे शामिल थे, जो अब धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे।
आरोप है कि गांव के ही रहने वाले अमित और रामशरण गोस्वामी ने अचानक जेसीबी मशीन मंगवाई और बिना किसी अनुमति या ठोस कारण के इन पौधों को जड़ से उखाड़ना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मनरेगा की मेहनत और सरकारी बजट से तैयार की गई हरियाली मलबे में तब्दील हो गई।
विरोध करने पर मारपीट की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान आकाश सिंह मौके पर पहुंचे और आरोपियों को रोकने का प्रयास किया। प्रधान का आरोप है कि आरोपियों ने न केवल काम रोकने से मना किया, बल्कि सत्ता और रसूख की धमक देते हुए प्रधान के साथ अभद्रता की। जब प्रधान ने पुरवामीर चौकी में शिकायत करने की बात कही, तो आरोपी मारपीट पर उतारू हो गए और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराजपुर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है।
शिकायत दर्ज: पुलिस ने अमित और रामशरण गोस्वामी के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की है।
अधिकारियों का बयान: महाराजपुर इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया, “हमें ग्राम प्रधान की ओर से शिकायत मिली है। जेसीबी से पौधों को उजाड़ना एक गंभीर अपराध है। मौके का मुआयना किया गया है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
मनरेगा और पर्यावरण को भारी नुकसान
मनरेगा के तहत किए जाने वाले वृक्षारोपण में न केवल सरकारी धन खर्च होता है, बल्कि गांव के मजदूरों को रोजगार भी मिलता है। सैकड़ों पौधों का नष्ट होना सीधे तौर पर उन मजदूरों की मेहनत और सरकारी खजाने को चोट पहुँचाना है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि दबंगों ने अपनी व्यक्तिगत रंजिश या कब्जे की नीयत से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है।
घटना का विवरण मुख्य जानकारी
स्थान सिकठिया गांव, महाराजपुर, कानपुर
मुख्य आरोपी अमित और रामशरण गोस्वामी
नुकसान सैकड़ों शीशम, नीम और बबूल के पौधे
योजना मनरेगा (MGNREGA)
पुलिस स्टेशन महाराजपुर थाना / पुरवामीर चौकी
निष्कर्ष
कानपुर की यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी दबंगई किस कदर हावी है। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुँचाने के बीच इस तरह के अवरोध न केवल विकास को रोकते हैं बल्कि कानून-व्यवस्था को भी चुनौती देते हैं। अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या आरोपियों से पौधों की भरपाई कराई जाएगी या उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।