मेरठ: ‘बुलडोजर अपराधियों पर, मासूमों पर नहीं’ – शास्त्रीनगर में घर बचाने की जंग में सड़क पर उतरीं महिलाएं
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के शास्त्रीनगर इलाके में आवास विकास परिषद की कार्रवाई को लेकर मचा घमासान अब और तेज हो गया है। पिछले छह दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं का धैर्य रविवार को जवाब दे गया। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच सेक्टर 3 और 4 की सैकड़ों महिलाएं अपने मासूम बच्चों को साथ लेकर सड़कों पर उतर आईं। हाथों में पोस्टर और आंखों में डर लिए इन महिलाओं ने सेंट्रल मार्केट में एक विशाल जुलूस निकाला और आवास विकास विभाग के खिलाफ जमकर हुंकार भरी।
भीषण गर्मी में प्रदर्शन और मची अफरा-तफरी
रविवार को जब तापमान अपने चरम पर था, तब ये महिलाएं भूखे-प्यासे अपने घरों को बचाने की गुहार लगा रही थीं। ‘नारी शक्ति एक है’ के नारों से पूरा सेंट्रल मार्केट गूंज उठा। इसी दौरान एक दर्दनाक मंजर भी देखने को मिला। पैदल मार्च करते हुए मीता नाम की एक महिला गर्मी और कमजोरी के कारण अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ीं।
महिला के बेहोश होते ही प्रदर्शनकारियों में हड़कंप मच गया। साथी महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला और कार के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुँचाया। गनीमत रही कि प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें घर भेज दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूट रही हैं, लेकिन प्रशासन की संवेदनहीनता उन्हें झुकने नहीं दे रही।
क्या है पूरा विवाद? (सेटबैक और ध्वस्तीकरण)
पूरा विवाद शास्त्रीनगर के सेक्टर 2, 3 और 4 में बने मकानों के ‘सेटबैक’ (मकान के आगे छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह) को लेकर है। आवास विकास परिषद का आरोप है कि आवंटियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सेटबैक की जगह पर निर्माण कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आवासीय भूखंडों का स्वरूप बदलकर उन्हें व्यावसायिक (Commercial) बना दिया गया है।
आवास विकास के अनुसार, यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। विभाग का तर्क है कि अवैध निर्माण को हटाना अनिवार्य है।
महिलाओं का पक्ष: “गिर जाएगा हमारा आशियाना”
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी महिलाओं का तर्क बेहद भावनात्मक और तकनीकी रूप से गंभीर है। सेक्टर-3 निवासी मीना भार्गव ने रूंधे गले से बताया कि ये मकान 35 से 40 साल पुराने हैं। उस समय के निर्माण में आज की तरह पिलर (Pillar) तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ था।
महिलाओं का कहना है कि यदि सेटबैक के नाम पर मकान के आगे के हिस्से को तोड़ा गया, तो पूरा घर ढह जाएगा। बच्चों के हाथों में मौजूद तख्तियां प्रशासन पर तीखा प्रहार कर रही थीं, जिन पर लिखा था— “बुलडोजर सिर्फ अपराधियों पर, मासूम परिवारों पर नहीं।” #### राज्यमंत्री के द्वार पर भी दी दस्तक
बता दें कि यह आंदोलन पिछले छह दिनों से लगातार जारी है। शुक्रवार को महिलाओं ने राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के आवास का घेराव किया था। शनिवार को भी धरना जारी रहा और रविवार को यह आक्रोश जुलूस की शक्ल में सड़क पर दिखाई दिया। महिलाओं का कहना है कि वे आधा पेट खाना खाकर अपने बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रही हैं।
निष्कर्ष
फिलहाल आवास विकास परिषद अपने रुख पर अड़ा है, वहीं महिलाएं पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यह विवाद अब केवल ईंट-पत्थरों का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा और उनके ‘सिर की छत’ का बन गया है। प्रशासन को इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकालना होगा, ताकि नियमों का पालन भी हो और मासूम परिवारों के आशियाने भी सुरक्षित रहें।