यूपी के आलू को मिलेगा नया बाजार: बुआई से पहले बनेगी खपत की रणनीति, नेपाल-श्रीलंका तक बढ़ेगा कारोबार
सार
उत्तर प्रदेश में आलू किसानों को राहत देने के लिए सरकार नई रणनीति बन रही है। अब बुआई से पहले ही खपत और विपणन का आकलन किया जाएगा, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण भारत के राज्यों में यूपी का आलू भेजने की तैयारी की जा रही है।

प्रदेश सरकार अब उन राज्यों से संपर्क कर रही है जहां आलू का उत्पादन कम होता है। – फोटो : AI Image
विस्तार
उत्तर प्रदेश में आलू किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने नई तैयारी शुरू कर दी है। इस बार किसानों को फसल बेचने में आई परेशानियों को देखते हुए अब अगले सीजन से पहले ही आलू की खपत, भंडारण और विपणन की रणनीति तैयार की जाएगी। कृषि, उद्यान, विपणन और प्रसंस्करण विभाग मिलकर संयुक्त कार्ययोजना बनाएंगे, ताकि उत्पादन अधिक होने की स्थिति में किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
दूसरे राज्यों और विदेशों में बढ़ेगी सप्लाई
प्रदेश सरकार अब उन राज्यों से संपर्क कर रही है जहां आलू का उत्पादन कम होता है। राजस्थान, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, दादरा नगर हवेली और दमन दीव जैसे राज्यों में यूपी का आलू भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही नेपाल में आलू निर्यात बढ़ाने और श्रीलंका तक सप्लाई शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम चल रहा है। खाड़ी देशों के बाजारों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
कोल्ड स्टोर भरने से बढ़ी किसानों की परेशानी
उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक आलू उत्पादन करने वाला राज्य है। इस वर्ष प्रदेश में करीब 246 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है। फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद और आगरा जैसे आलू बेल्ट वाले जिलों में कोल्ड स्टोर भर जाने के कारण किसानों के खेतों में आलू के ढेर लग गए हैं। प्रदेश में 2363 कोल्ड स्टोर हैं, जिनकी कुल क्षमता 202 लाख मीट्रिक टन है। इस बार 172 लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोर में रखा गया है, जबकि 131 नए कोल्ड स्टोर भी शुरू हुए हैं।
अगले वर्ष के लिए अभी से बनेगी कार्ययोजना
सरकार अब अगले सीजन के लिए पहले से तैयारी करेगी। इसके लिए कृषि अनुसंधान परिषद और आगरा में स्थापित हो रहे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के क्षेत्रीय केंद्र की मदद भी ली जाएगी। हाल ही में लखनऊ में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक में इस दिशा में सुझाव दिए थे।
उद्यान निदेशक बीपी राम के अनुसार कुछ व्यापारी पहले से नेपाल को आलू भेज रहे हैं और अब श्रीलंका व खाड़ी देशों में भी संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। व्यापारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि अगले वर्ष किसानों को मौजूदा जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।