आगरा

आगरा: तीन कॉलेजों में शिक्षक नियुक्तियों में बड़ी धांधली की आशंका, DIOS ने शुरू की कड़ी जांच

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जनपद के तीन प्रमुख इंटर कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामला संज्ञान में आते ही जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। वर्तमान में इन संदिग्ध नियुक्तियों से जुड़ी फाइलें विभाग से गायब हैं, जिसके चलते संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।

इन कॉलेजों में खंगाले जा रहे हैं रिकॉर्ड

​जांच का मुख्य केंद्र धूलियागंज स्थित श्री दिगंबर जैन इंटर कॉलेज, स्वामी लीलाशाह आदर्श सिंधी इंटर कॉलेज और खेरागढ़ स्थित जनता इंटर कॉलेज हैं। विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार, इन संस्थानों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है और नियमों को ताक पर रखकर चयन किया गया है।

गायब हैं मूल अभिलेख, वेतन पर लगी रोक

​जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर ने मीडिया को बताया कि स्वामी लीलाशाह आदर्श सिंधी इंटर कॉलेज में 8 सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग के पास इन नियुक्तियों से संबंधित कोई भी मूल पत्रावली या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ठीक इसी तरह, जनता इंटर कॉलेज में 4 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्तियों पर भी सवालिया निशान खड़े हुए हैं।

​DIOS ने स्पष्ट किया है कि जब तक अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति से संबंधित मूल पत्रावली और विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षरयुक्त वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं करते, तब तक किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को वेतन जारी नहीं किया जाएगा।

श्री दिगंबर जैन इंटर कॉलेज का मामला

​धूलियागंज स्थित श्री दिगंबर जैन इंटर कॉलेज में एलटी ग्रेड (LT Grade) सहायक अध्यापकों की नियुक्ति और उनके अनुमोदन (Approval) को लेकर सबसे अधिक संदेह जताया जा रहा है। जांच के अनुसार, चयन समिति ने साक्षात्कार के अंकों के आधार पर निम्नलिखित शिक्षकों का चयन किया था:

  • ​अमिता जैन
  • ​अनुज कुमार चौहान
  • ​करिश्मा चौहान
  • ​सुनीता त्यागी
  • ​सुप्रिया यादव (संबद्ध प्राथमिक विद्यालय)

​इन सभी शिक्षकों को नोटिस जारी कर उनके मूल शैक्षणिक और नियुक्ति संबंधी दस्तावेज तलब किए गए हैं। विभाग यह जांच रहा है कि क्या इनके चयन में निर्धारित आरक्षण नियमों और मेरिट का पालन किया गया है या नहीं।

शिक्षा विभाग में हड़कंप

​इस कार्रवाई के बाद जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में हड़कंप मच गया है। शिक्षा विभाग अब पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या पूर्व में भी इस तरह की फर्जी नियुक्तियां कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है। DIOS चंद्रशेखर के अनुसार, मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है और शासन से निर्देश मिलते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।

निष्कर्ष

​आगरा में सामने आया यह मामला उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। बिना मूल दस्तावेजों के नियुक्तियां होना विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या ये नियुक्तियां रद्द की जाएंगी या इनके पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ बेनकाब होंगे।

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