बागपत न्यूज़: मीतली रजबहे की पटरी टूटने से कहर, 200 बीघा गेहूं और चारे की फसल जलमग्न
खेकड़ा (बागपत)। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा क्षेत्र में सिंचाई विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कस्बे के जंगल से गुजर रहे मीतली रजबहे की जर्जर पटरी शनिवार रात अचानक टूट गई, जिससे आसपास के खेतों में सैलाब जैसा मंजर देखने को मिला। इस हादसे के कारण लगभग 200 बीघा में खड़ी गेहूं और चारे की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
लापरवाही की भेंट चढ़ी किसानों की मेहनत
स्थानीय किसानों का आरोप है कि रजबहे की पटरी लंबे समय से जर्जर स्थिति में थी। किसानों ने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसकी मरम्मत की गुहार लगाई थी, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। मरम्मत कार्य कराए बिना ही रजबहे में पानी छोड़ दिया गया, जिसका परिणाम शनिवार रात पटरी टूटने के रूप में सामने आया।
रविवार सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खेतों में लबालब पानी भरा हुआ था और तैयार खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी थीं।
इन किसानों को हुआ भारी नुकसान
पटरी टूटने से आई इस ‘कृत्रिम बाढ़’ ने कई किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। प्रभावित किसानों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- धर्मबीर
- जितेंद्र धामा
- तेजपाल
- रविंद्र कुमार
- सतेंद्र
- प्रदीप कुमार
- जयबीर
- राजेश
इन किसानों की गेंहू और पशुओं के चारे की फसल अब बर्बाद होने की कगार पर है। किसानों का कहना है कि अत्यधिक जलभराव के कारण फसलों की जड़ें गल सकती हैं, जिससे पैदावार न के बराबर होगी।
सिंचाई विभाग की कार्रवाई और किसानों की मांग
घटना की सूचना मिलने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। विभाग की टीम ने आनन-फानन में मशीनों की मदद से टूटी हुई पटरी को ठीक करने का काम शुरू किया। सिंचाई विभाग के एक्सईएन रजनीश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को सक्रिय कर दिया गया था और अब पटरी को पूरी तरह ठीक करा दिया गया है।
हालांकि, किसानों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए।
- रजबहे की पटरी का स्थायी सुदृढ़ीकरण कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
- लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
खेती-किसानी पहले ही मौसम की मार झेल रही है, ऐसे में विभाग की तकनीकी लापरवाही किसानों की कमर तोड़ देती है। बागपत के खेकड़ा की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण बुनियादी ढांचे की बदहाली को उजागर करती है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल पटरी मरम्मत तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ित किसानों को उनके नुकसान की भरपाई भी सुनिश्चित करे।