लखनऊ

UP: 6 साल, 3 एजेंसियां और फिर भी खाली हाथ; रितु देवी केस में CBI ने टेके घुटने, दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब छह साल पहले लापता हुई रितु देवी के मामले में देश की सबसे प्रीमियम जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल अपनी 8 पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट में CBI ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अब इस मामले में आगे की जांच या तलाश मुमकिन नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

​यह मामला फतेहपुर जिले के कल्यानपुर थाना क्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली 22 वर्षीय रितु देवी (अनुसूचित जाति) की शादी कानपुर के साढ़ थाना क्षेत्र में हुई थी। परिजनों का आरोप था कि 23 फरवरी 2021 को गांव के ही हैप्पी सिंह और उसके साथियों ने रितु का अपहरण कर लिया था। जब स्थानीय पुलिस ने मामले में ढिलाई बरती, तो परिवार ने न्याय के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जांच का लंबा सफर: पुलिस से STF और फिर CBI

​रितु देवी की तलाश के लिए उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की पूरी ताकत झोंक दी गई थी:

  1. कल्यानपुर पुलिस: शुरुआती जांच में लापरवाही के आरोप लगे।
  2. SIT और STF: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विशेष जांच दल (SIT) और फिर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को जिम्मेदारी दी गई। टीमों ने महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार तक खाक छानी, 200 से अधिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  3. CBI को जिम्मेदारी: 5 फरवरी 2024 को जब STF भी असफल रही, तो हाईकोर्ट ने मामला CBI को सौंप दिया।

CBI की जांच के मुख्य बिंदु और चुनौतियां

​CBI ने अपनी जांच में तकनीक और जमीनी स्तर पर हर संभव प्रयास किए, जिनका विवरण क्लोजर रिपोर्ट में दिया गया है:

  • इनाम और विज्ञापन: रितु का पता बताने वाले के लिए 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई। मुंबई, गुजरात और बिहार के प्रमुख शहरों में पंपलेट लगवाए गए।
  • डिजिटल फुटप्रिंट का अभाव: रितु के आधार कार्ड से कोई मोबाइल नंबर लिंक नहीं मिला। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के 8 साल के डेटा की भी जांच की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
  • नार्को टेस्ट का खुलासा: 28 नवंबर 2025 को रितु की भाभी का नार्को टेस्ट कराया गया। टेस्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई कि रितु ने अपनी भाभी से फोन पर बात की थी और कहा था कि वह न तो मायके लौटेगी और न ही कभी ससुराल जाएगी।

एजेंसी का निष्कर्ष: ‘स्वेच्छा से गायब होना’

​CBI का मानना है कि रितु देवी अपनी मर्जी से कहीं छिपकर रह रही है और उसने जानबूझकर अपनी पहचान के सारे निशान मिटा दिए हैं। क्लोजर रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के सूरत में उसकी आखिरी लोकेशन मिली थी, लेकिन उसके बाद वह कहाँ गई, इसका कोई भौतिक या डिजिटल साक्ष्य मौजूद नहीं है। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि अब जांच के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं।

निष्कर्ष

​छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई और तीन बड़ी एजेंसियों की जांच के बाद भी रितु देवी का रहस्य अनसुलझा ही रह गया। जहाँ परिवार अभी भी किसी अनहोनी की आशंका में है, वहीं CBI की रिपोर्ट ने इस केस पर कानूनी रूप से ‘पूर्ण विराम’ लगाने की सिफारिश कर दी है। अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।

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