ईरान-इजरायल युद्ध का असर: खाड़ी देशों में फंसे लखनऊ के सवा लाख लोग, 17 उड़ानें रद्द
लखनऊ। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों के परिवारों की नींद उड़ा दी है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच लखनऊ के लगभग सवा लाख लोग खाड़ी देशों (Gulf Countries) में फंस गए हैं। ईरान का एयरस्पेस बंद होने और सुरक्षा कारणों से विमान सेवाओं के ठप होने से वहां मौजूद भारतीय नागरिक अब ट्रैवल एजेंसियों और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
दहशत में लखनवी परिवार: फोन पर मांग रहे मदद
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के करीब 1.25 लाख लोग इस समय ईरान, ओमान, बहरीन, मस्कट, रियाद, दुबई और शारजाह जैसे देशों में मौजूद हैं। इनमें से 90 प्रतिशत लोग कामगार हैं, जबकि 10 प्रतिशत पर्यटक या जियारत (धार्मिक यात्रा) के लिए गए हुए हैं।
ट्रैवल एजेंसियों के पास लगातार फोन आ रहे हैं। एयरवॉक ट्रैवल एजेंसी के संचालक आतिफ के मुताबिक, लखनऊ एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए हर हफ्ते लगभग 115 उड़ानें संचालित होती हैं। वर्तमान में फ्लाइट्स कैंसिल होने के कारण लोग वहां फंसे हुए हैं और जल्द से जल्द वतन वापसी चाहते हैं।
17 उड़ानें निरस्त: अमौसी एयरपोर्ट पर सन्नाटा
शनिवार और रविवार को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी) से खाड़ी देशों को जोड़ने वाली 17 उड़ानें रद्द कर दी गईं। सबसे ज्यादा प्रभाव इंडिगो और एअर इंडिया की उड़ानों पर पड़ा है।
प्रभावित उड़ानों का विवरण:
- इंडिगो: दम्माम, रियाद, मस्कट, रसअलखैमा और शारजाह जाने वाली उड़ानें (6E-097, 6E-053, 6E-1423 आदि) निरस्त रहीं।
- एअर इंडिया: लखनऊ-रियाद मार्ग की एआई-2250 उड़ान प्रभावित हुई।
- अन्य: परिचालन कारणों से स्टार एयर की किशनगढ़ और झारसुगड़ा की उड़ानें भी रद्द रहीं।
यूपी के अन्य जिलों में भी बढ़ी चिंता
संकट का असर सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। गोंडा, अंबेडकरनगर और आसपास के जिलों के सैकड़ों परिवार भी अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। गोंडा के शास्त्रीनगर तोपखाना मोहल्ले के शबाहत हुसैन के भाई फसाहत हुसैन सपरिवार ईरान में हैं। वहीं, अंबेडकरनगर के करीब 100 से अधिक परिवारों के सदस्य रोजी-रोटी और शिक्षा के सिलसिले में ईरान के विभिन्न शहरों में रह रहे हैं, जिनसे संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं।
जियारत पर भी पड़ा असर
लखनऊ से हर महीने लगभग 700-800 लोग जियारत के लिए ईरान जाते हैं। चूंकि लखनऊ से ईरान के लिए सीधी फ्लाइट नहीं है, इसलिए यात्री दिल्ली या दुबई के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट लेते हैं। दुबई एयरस्पेस बंद होने और ईरान में अस्थिरता के कारण इन यात्रियों का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है।
आगे क्या?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जब तक एयरस्पेस पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक विमान सेवाओं की बहाली मुश्किल दिख रही है। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।