UP News: कानपुर में 425 फर्जी फर्मों का भंडाफोड़, SGST ने 309 का पंजीकरण रद्द; चार गिरफ्तार
सार
कानपुर में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) विभाग ने बड़े पैमाने पर फर्जी फर्मों के जरिए की जा रही टैक्स चोरी का खुलासा किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 425 फर्जी फर्में पकड़ी गई हैं। 309 फर्मों का पंजीकरण रद्द, 36 का निलंबन किया गया है। आठ फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।
विस्तार
कानपुर में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) विभाग ने फर्जी कंपनियों के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी है। विभाग की जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 425 फर्में केवल कागजों पर संचालित हो रही थीं और इनके जरिए करीब 369 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और टैक्स की हेराफेरी की गई।
इनमें से 309 फर्मों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है, जबकि 36 फर्मों का पंजीकरण निलंबित किया गया है। बाकी मामलों में भी जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक ये फर्में स्क्रैप, आयरन और स्टील के व्यापार से जुड़ी दिखायी जा रही थीं। लेकिन भौतिक सत्यापन, डाटा विश्लेषण और पंजीयन दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अधिकांश फर्मों के पास न तो वास्तविक व्यापार स्थल था और न ही माल का वास्तविक परिवहन। बिलों का आदान-प्रदान केवल फर्जी आईटीसी लेने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
आठ फर्मों पर एफआईआर, चार गिरफ्तार
जांच के दौरान कुमार इंटरप्राइजेज और केटी ट्रेडर्स समेत आठ फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कुमार इंटरप्राइजेज से जुड़े मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो स्थानीय पुलिस के सहयोग से हर पहलू की गहन जांच कर रही है।
24 अन्य मामलों में भी अलग-अलग थानों में तहरीर दी गई है और जल्द ही इन पर एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।
72 करोड़ की आईटीसी में पहले भी गड़बड़ी
अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी 36 फर्मों का पंजीकरण निरस्त कर लगभग 72 करोड़ रुपये की आईटीसी में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इस बार कार्रवाई का दायरा और बड़ा है।
प्रतिष्ठित सीए के पते का दुरुपयोग
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि स्वरूपनगर स्थित एक प्रतिष्ठित सीए के आवासीय पते का इस्तेमाल कर कुमार इंटरप्राइजेज नाम से फर्जी फर्म खोली गई थी। फर्म ने वर्ष 2024-25 में 56.27 करोड़ रुपये की खरीद दिल्ली और बिहार की फर्मों से दिखायी, जबकि संबंधित फर्मों का पंजीकरण पहले ही निरस्त हो चुका था।
इसके अलावा जीएसटीआर-3बी में 155.89 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई गई, जबकि इनवर्ड सप्लाई का कोई वास्तविक रिकॉर्ड नहीं मिला। अप्रैल 2025 में भी बिना माल खरीदे 54.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्शाने का मामला सामने आया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि घोषित व्यापार स्थल एक आवासीय भवन था। बिजली के बिल, किरायानामा और मोबाइल नंबर भी संदिग्ध पाए गए। नोटरी सील के दुरुपयोग की भी पुष्टि हुई है। संबंधित अधिवक्ता ने अपने सील के गलत इस्तेमाल की बात कही है।
फर्म संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।