कानपुर फर्जी डिग्री कांड: गणित का शिक्षक निकला गिरोह का सरगना, 12 विश्वविद्यालयों की 800 से अधिक डिग्रियां बरामद
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो शिक्षा जगत की जड़ों को खोखला कर रहा था। किदवईनगर पुलिस ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के बाबुओं के साथ मिलकर फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार करने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। इस गिरोह का सरगना कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक पूर्व गणित शिक्षक है, जो छात्रों को बिना परीक्षा दिए पास कराने और उनकी मार्कशीट ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाने की 100% गारंटी देता था।
शिक्षक से ‘डिग्री माफिया’ बनने का सफर
पुलिस की गिरफ्त में आया मुख्य आरोपी शैलेंद्र कुमार, मूल रूप से रायबरेली के ऊंचाहार का रहने वाला है। शैलेंद्र ने गणित में परास्नातक (M.Sc) किया है और वह लंबे समय तक एक निजी कॉलेज में गणित का शिक्षक रहा। शिक्षक रहने के दौरान ही उसकी पहचान विभिन्न विश्वविद्यालयों के क्लर्कों (बाबुओं) से हुई। पैसों के लालच में उसने शिक्षण कार्य छोड़ दिया और जूही गौशाला इलाके में ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ के नाम से एक कार्यालय खोल लिया। यहाँ से वह शिक्षा का नहीं, बल्कि फर्जीवाड़े का कारोबार चलाने लगा।
ऐसे चलता था खेल: ‘ऑनलाइन दिखने की गारंटी’
इस गिरोह की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि ये केवल कागज पर डिग्री नहीं देते थे, बल्कि उसे यूनिवर्सिटी के डेटाबेस में ऑनलाइन भी चढ़वा देते थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, शैलेंद्र ने साकेतनगर के कविशा अपार्टमेंट में अपना ठिकाना बनाया था। वह ऐसे भ्रष्ट बाबुओं को ढूंढता था जो पैसों के लिए यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर सकें।
एक बार जब छात्र से डील पक्की हो जाती, तो बाबू के जरिए फर्जी डाटा फीड कराया जाता था। इसके बाद अगर कोई नियोक्ता या विभाग ऑनलाइन वेरिफिकेशन करता, तो वह मार्कशीट असली दिखाई देती थी। इस ‘गारंटी’ के बदले गिरोह छात्रों से मोटी रकम वसूलता था।
छात्रों का डेटा लीक: फेल छात्रों को बनाते थे निशाना
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि गिरोह के पास उन छात्रों की पूरी सूची होती थी जो परीक्षाओं में फेल हो गए थे। विश्वविद्यालयों के अंदर बैठे भ्रष्ट कर्मचारी ही इन फेल छात्रों का डेटा लीक करते थे। डेटा मिलने के बाद गिरोह के सदस्य इन छात्रों से संपर्क करते और उन्हें बिना दोबारा परीक्षा दिए सीधे पास की मार्कशीट और डिग्री दिलाने का लालच देते। भरोसा जीतने के लिए वे 75 फीसदी रकम काम होने के बाद या मार्कशीट मिलने पर लेते थे।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
जब पुलिस ने शैलेंद्र के कार्यालय पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। मौके से 12 अलग-अलग विश्वविद्यालयों की 800 से अधिक डिग्रियां और मार्कशीट बरामद हुईं। इनमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट से लेकर बीटेक (B.Tech) और एलएलबी (LLB) तक की डिग्रियां शामिल थीं। इसके अलावा, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मुहर और लगभग 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी बरामद किए गए हैं।
इन विश्वविद्यालयों की मिलीं फर्जी डिग्रियां:
पुलिस द्वारा बरामद की गई डिग्रियों का विवरण इस प्रकार है:
- छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर: 357
- एशियन विश्वविद्यालय, मणिपुर: 280
- श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय, छतरपुर: 102
- लिंग्या विश्वविद्यालय, फरीदाबाद: 100
- मंगलायतन यूनिवर्सिटी, नोएडा: 40
- प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, झारखंड: 23
- जेएस विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद: 11
- अन्य: सुभारती विश्वविद्यालय, ग्लोबल विश्वविद्यालय, सिक्किम प्रोफेशनल आदि।
गिरफ्तारी और फरार आरोपी
पुलिस ने अब तक शैलेंद्र कुमार के साथ नागेंद्र मणि त्रिपाठी (कंप्यूटर एक्सपर्ट), जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। हालांकि, गिरोह के पांच अन्य सदस्य—मयंक भारद्वाज, मनीष, विनीत, शेखू और शुभम दुबे अभी भी फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश में छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही विश्वविद्यालय के उन बाबुओं पर भी शिकंजा कसा जाएगा जो इस काले कारोबार में शामिल थे।
यह मामला केवल कानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में इस गिरोह ने कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां बेची हैं और वे लोग वर्तमान में किन सरकारी या निजी संस्थानों में नौकरी कर रहे हैं।