कानपुर

कानपुर: 8.30 करोड़ की भारी-भरकम जमानत पर रिहा होगी ‘सुपरकार’, कोर्ट ने कार मालिक को दी कड़ी चेतावनी

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में चर्चित वीआईपी रोड हादसे में शामिल लग्जरी सुपरकार लैंबोर्गिनी को लेकर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूरज मिश्रा की अदालत ने पिछले 20 दिनों से थाने में खड़ी इस कार को उसके मालिक को वापस सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि, यह राहत इतनी आसान नहीं है; कार को छुड़ाने के लिए मालिक को 8.30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम जमानत राशि और एक ठोस अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) जमा करनी होगी।

क्या था पूरा मामला?

​यह मामला 7 फरवरी 2026 का है, जब शहर के पॉश इलाके वीआईपी रोड पर एक तेज रफ्तार लैंबोर्गिनी कार ने दुर्घटना को अंजाम दिया था। यह कार मशहूर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की है। हादसे के बाद ग्वालटोली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार को जब्त कर लिया था और तब से यह थाने के मालखाने में खड़ी थी।

​इस मामले में कानूनी पेच तब फंसा जब शिवम मिश्रा की ओर से कोर्ट में समर्पण अर्जी दाखिल की गई और दावा किया गया कि कार चालक मोहन एम. चला रहा था। हालांकि, पुलिस की जांच रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा खुद कार चला रहे थे। तकनीकी आधारों और पुलिस की दलीलों के बीच, कोर्ट ने पहले मोहन की अर्जी खारिज की और बाद में शिवम को गिरफ्तार कर पेश किया गया। हालांकि, कुछ कानूनी बारीकियों के चलते शिवम को न्यायिक हिरासत में भेजने की अर्जी खारिज हो गई और उन्हें रिहाई मिल गई।

8.30 करोड़ की जमानत और कड़ी शर्तें

​कार को वापस पाने के लिए शिवम मिश्रा की ओर से उनके पावर ऑफ अटार्नी सुनील कुमार ने कोर्ट में पैरवी की। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद सीजेएम कोर्ट ने कार को रिलीज करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन इसके साथ ऐसी शर्तें जोड़ दी हैं जिनसे कार मालिक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कोर्ट द्वारा लगाई गई मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:

  1. बिक्री पर रोक: वाहन मालिक इस सुपरकार को न तो किसी को बेच सकेगा और न ही इसका मालिकाना हक किसी और को हस्तांतरित कर सकेगा।
  2. स्वरूप में बदलाव नहीं: कार के मूल स्वरूप, इंजन नंबर, चेसिस नंबर या उसके रंग में किसी भी तरह का बदलाव करना पूरी तरह वर्जित है।
  3. कोर्ट में उपस्थिति: जब भी विवेचक (जांच अधिकारी) या अदालत कार को निरीक्षण के लिए बुलाएगी, मालिक को अपने खर्च पर कार पेश करनी होगी।
  4. जुर्माना प्रावधान: यदि ऊपर दी गई किसी भी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है, तो जमानत की राशि यानी 8.30 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करने होंगे।
  5. सत्यापन प्रक्रिया: यदि भविष्य में जमानत के दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो तत्काल दूसरी जमानत राशि दाखिल करनी होगी।

कानून का कड़ा रुख

​कानपुर का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि आमतौर पर दुर्घटना के मामलों में इतनी बड़ी जमानत राशि देखने को नहीं मिलती। जानकारों का मानना है कि कार की अत्यधिक कीमत और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने इतनी बड़ी राशि तय की है ताकि कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके और सबूतों (कार के रूप में) के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।

​फिलहाल, ग्वालटोली पुलिस कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने का इंतजार कर रही है। आवश्यक कागजी कार्रवाई और जमानत राशि के सत्यापन के बाद ही यह ‘सुपरकार’ फिर से सड़कों पर उतर सकेगी।

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