वाराणसी

शाइन सिटी महाठगी: 7 साल, 127 FIR और अरबों का फ्रॉड; भगोड़ा राशिद नसीम दुबई में गिरफ्तार

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े रियल एस्टेट घोटालों में से एक ‘शाइन सिटी’ (Shine City) के मास्टरमाइंड राशिद नसीम पर कानून का शिकंजा कस गया है। सालों से पुलिस और जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर विदेश में छिपा बैठा राशिद नसीम आखिरकार यूएई (दुबई) में गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर हुई इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के हजारों निवेशकों में अपनी डूबी हुई पूंजी वापस मिलने की उम्मीद जगी है।
​वाराणसी में मुकदमों का ‘शतक’
​राशिद नसीम के ठगी के साम्राज्य का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले वाराणसी कमिश्नरेट में पिछले सात सालों में उस पर 127 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 110 मुकदमे कैंट थाने में दर्ज हैं। वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के अन्य जिलों, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी उस पर दर्जनों मामले लंबित हैं। ईओडब्ल्यू (EOW) वर्तमान में 100 से अधिक मामलों की गहनता से जांच कर रही है।
​कैसे बुना ठगी का जाल?
​प्रयागराज के रहने वाले राशिद नसीम ने 2013 में वाराणसी के जेपी मेहता रोड पर अपना कार्यालय खोलकर ‘शाइन सिटी’ की शुरुआत की थी। उसने स्थानीय प्रभावशाली लोगों को कंपनी में ऊंचे पदों पर बिठाया ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सके। राशिद और उसके भाई आसिफ ने निम्नलिखित तरीकों से लोगों को लूटा:
​सस्ते प्लॉट का लालच: हाईवे के पास की जमीन दिखाकर एक ही प्लॉट को 4-5 अलग-अलग लोगों को बेच दिया गया।
​आकर्षक स्कीम्स: निवेश दोगुना करने, गोल्ड स्कीम और लुभावने टूर पैकेज के नाम पर लोगों की गाढ़ी कमाई जमा कराई गई।
​हवाला और विदेशी निवेश: जांच में सामने आया कि देश छोड़ने से पहले राशिद ने हवाला और गुजरात की एक कंपनी के जरिए करीब 30 करोड़ रुपये विदेश भेज दिए थे।
​विलासी जीवन और गिरफ्तारी का सफर
​2019 में जब घोटाले की परतें खुलने लगीं, तो राशिद नेपाल के रास्ते दुबई भाग गया। वहां वह सोने का कारोबार और होटल व्यवसाय संचालित कर रहा था। ईओडब्ल्यू की पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि वह ठगी की रकम का 60 प्रतिशत खुद पर और अपनी बचत पर खर्च करता था, जबकि शेष 40 प्रतिशत ऑफिस मेंटेनेंस और एजेंटों के कमीशन में जाता था।
​प्रशासन की अब तक की कार्रवाई
​2021 में वाराणसी के तत्कालीन पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने इस गिरोह पर सख्त कार्रवाई की थी। गैंगस्टर एक्ट के तहत राशिद की वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज में स्थित 18 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। वाराणसी में अभी भी उसकी लगभग 45 करोड़ की संपत्ति चिह्नित है। राशिद का भाई आसिफ और उसके कई मुख्य सहयोगी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
​निवेशकों को क्या मिलेगी राहत?
​राशिद की गिरफ्तारी के बाद अब भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया शुरू करेगी। यदि राशिद को भारत लाया जाता है, तो उसकी संपत्तियों की नीलामी और बैंक खातों की जब्ती के जरिए उन हजारों पीड़ितों को पैसा वापस मिलने का रास्ता साफ हो सकता है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इस ‘शाइन सिटी’ के सपने में लगा दी थी।

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