TET अनिवार्यता पर आर-पार की जंग: यूपी के शिक्षक मार्च में दिल्ली में करेंगे शक्ति प्रदर्शन:-
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों शिक्षकों ने अब अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद, शिक्षक संगठनों ने ‘टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (TFI) के नेतृत्व में एक निर्णायक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
शिक्षकों की मुख्य मांग 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त हुए अध्यापकों को TET की अनिवार्यता से छूट दिलाना है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए हाल ही में लखनऊ के रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के दिग्गज शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति तैयार की।
प्रमुख संगठनों का मिला समर्थन
इस बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षक अब पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपनी सेवा शर्तों की रक्षा के लिए दिल्ली तक का सफर तय करेंगे।
आंदोलन का पूरा शेड्यूल (Timeline)
शिक्षक संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है:
- 22 फरवरी (सोशल मीडिया अभियान): दोपहर 2 से 4 बजे तक माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा ताकि सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
- 23 से 25 फरवरी (काली पट्टी): प्रदेश भर के शिक्षक अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे और शिक्षण कार्य जारी रखेंगे।
- 26 फरवरी (BSA कार्यालय पर धरना): सभी जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालयों पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारी (DM) कार्यालय तक पैदल मार्च निकाल कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- मार्च का तीसरा सप्ताह (दिल्ली महारैली): आंदोलन का सबसे बड़ा चरण मार्च के अंत में दिल्ली में आयोजित होगा, जहाँ देश भर के शिक्षक जुटेंगे।
क्या है मुख्य विवाद?
विवाद की जड़ 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य बनाना है। शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब यह नियम अस्तित्व में नहीं था, इसलिए इसे पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective effect) से लागू करना उनके करियर और सेवा लाभों के साथ अन्याय है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख चेहरा
बैठक में डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा (TFI), योगेश त्यागी (जूनियर हाईस्कूल संघ), डॉ. सुलोचना मौर्य (महिला शिक्षक संघ) सहित संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय और प्रीति सिंह जैसे नेताओं ने सक्रिय भागीदारी की। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी फोन के माध्यम से इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश के शिक्षकों का यह रुख स्पष्ट करता है कि वे अब अपनी मांगों को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं। यदि केंद्र सरकार मार्च की रैली से पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आने वाले दिनों में शिक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।