लखनऊ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: “सपा-कांग्रेस में मुझे इस्तेमाल करने की चतुराई नहीं, भाजपा दे मेरा साथ”

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आध्यात्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में साफ कर दिया है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के हाथों की कठपुतली नहीं हैं। उन्होंने कहा, “सपा, कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल इतना चतुर नहीं है कि चुनाव में मेरा इस्तेमाल कर सके।”

भाजपा को दिया साथ आने का न्योता

​शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनके आंदोलन का केंद्र बिंदु ‘गंगा’ और ‘गोरक्षा’ है। उन्होंने तर्क दिया कि ये वही मुद्दे हैं जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कोर एजेंडे में रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि यदि भाजपा चाहे, तो वह उनके इस अभियान का समर्थन कर सकती है। उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि कोई भी दल अपनी चालाकी से उनका राजनीतिक लाभ उठा सकता है।

क्या है ‘चतुरंगिणी सेना’ और गोरक्षा का संकल्प?

​लखनऊ के हासेमऊ स्थित गोशाला में गो-पूजन के बाद शंकराचार्य ने ‘गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत की। उन्होंने गोरक्षा के लिए एक ‘चतुरंगिणी सेना’ बनाने की घोषणा की है। इस सेना के चार मुख्य स्तंभ होंगे:

  1. बुद्धि का बल (शास्त्रों का ज्ञान)
  2. बाहुबल (रक्षा की शक्ति)
  3. धनबल (संसाधनों की उपलब्धता)
  4. सहयोगियों का बल (जनता का समर्थन)

​उन्होंने ऋग्वेद के मंत्रों का जाप कराया और समर्थकों को भगवान कृष्ण की ‘चक्र मुद्रा’ का अभ्यास भी कराया। उन्होंने उन लोगों को ‘वृत्रासुर’ की संज्ञा दी जो गायों को कष्ट देते हैं या कसाईखानों के संचालन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हैं।

अखिलेश यादव की मुलाकात और ‘नकली संतों’ पर प्रहार

​इस अभियान के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से मुलाकात की। लगभग एक घंटे तक चली इस मुलाकात में अखिलेश यादव जमीन पर बैठकर चर्चा करते नजर आए। मुलाकात के बाद अखिलेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “शंकराचार्य के आशीर्वाद से अब ‘नकली संतों’ का अंत होगा।” उनका इशारा उन लोगों की ओर था जो धर्म की आड़ में राजनीति करते हैं।

​अखिलेश यादव ने सपा सरकार के दौरान कन्नौज में लगाए गए गाय के दूध के प्लांट का जिक्र करते हुए भाजपा पर गो-सेवा के नाम पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने उस मिल्क प्लांट को बंद करके गो-पालकों का नुकसान किया है।

सरकार पर अन्य मुद्दों को लेकर घेरा

​सपा प्रमुख ने केवल धर्म ही नहीं, बल्कि घरेलू गैस संकट और जेपीएनआईसी (JP NIC) की उपेक्षा पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज लोग गैस की किल्लत के कारण फिर से लकड़ी और चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जिसके लिए पूरी तरह केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

निष्कर्ष

​शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ले आया है। एक तरफ जहां वे गोरक्षा को लेकर ‘धर्मयुद्ध’ की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल के नेताओं का उनके पास पहुंचना आगामी चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि भाजपा शंकराचार्य के इस ‘न्योते’ पर क्या रुख अपनाती है।

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