लखनऊ

झांसी: छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की जेल, कोर्ट ने सुनाया 4 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला

झांसी कोर्ट का बड़ा फैसला: दुष्कर्म के दोषी अखिलेश पाल को 10 साल की कैद

​उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ की एक अदालत ने करीब चार साल पुराने छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है। अपर न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने आरोपी अखिलेश पाल को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

क्या था पूरा मामला?

​यह मामला साल 2022 का है, जब झांसी के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मोहल्ले में रहने वाली बीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने आरोपी अखिलेश पाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अखिलेश पाल (निवासी रक्सा) छात्रा का कॉलेज आते-जाते समय पीछा करता था और उसके साथ छेड़खानी करता था।

​घटना की गंभीरता तब बढ़ गई जब 10 अप्रैल 2022 को छात्रा घर में अकेली थी। उस समय उसके माता-पिता बाजार गए हुए थे। आरोप है कि दोपहर करीब दो बजे अखिलेश जबरन घर में घुस आया और छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी ने छात्रा को धमकी दी कि यदि उसने इस बारे में किसी को बताया तो वह उसके चेहरे को तेजाब से जला देगा।

डर और धमकियों के बीच बीता समय

​तेजाब के हमले की धमकी से डरी हुई छात्रा काफी समय तक चुप रही। लेकिन आरोपी की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वह छात्रा को लगातार धमकी भरे मैसेज भेजने लगा। मानसिक प्रताड़ना और डर जब हद से बाहर हो गया, तब छात्रा ने साहस जुटाकर अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद 10 अगस्त 2022 को कोतवाली में अखिलेश पाल और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट का रुख

​पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और मात्र एक महीने के भीतर 22 सितंबर 2022 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने अखिलेश पाल के खिलाफ प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को विश्वसनीय माना और उसे धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी पाया।

​हालांकि, इसी मामले में मारपीट और धमकाने के आरोपी अखिलेश के पिता गुरुदयाल, मां उर्मिला, चाचा सेवाराम, चाची गीता और अवसर पाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल सके। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने परिवार के इन पांच सदस्यों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया।

न्याय की जीत

​यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानून अपनी शक्ति से कार्य करता है। भले ही मामले में समय लगा हो, लेकिन कोर्ट ने पीड़िता के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य दोषी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जुर्माना राशि न भरने की स्थिति में दोषी की सजा और बढ़ाई जा सकती है।

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