कानपुर का ‘कूड़ा पहाड़’ बना ज़हर! पनकी में 50,000 लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर, मशीनें धूल खा रही हैं
कानपुर का ‘कूड़ा पहाड़’ बना ज़हर: पनकी में जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हजारों लोग
कानपुर के पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट अब शहर के लिए एक बड़ी पर्यावरणीय और स्वास्थ्य आपदा में बदल गया है। जैविक खाद बनाने का काम ठप होने से यहां कूड़े के विशाल पहाड़ खड़े हो गए हैं, जिससे आसपास के लगभग 50,000 लोगों का जीवन नरकीय बन गया है। गंदगी, असहनीय बदबू और हाल ही में कूड़े में लगी आग से निकलने वाला जहरीला धुआं क्षेत्र में सांस लेना भी दूभर कर रहा है।
मशीनें बंद, काम ठप: 46 एकड़ में फैला कूड़े का साम्राज्य
पनकी के ग्राम भऊ सिंह में बाईपास के किनारे से पांडु नदी तक फैला 46 एकड़ का यह प्लांट अब कूड़े के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों का घर बन गया है। कानपुर शहर से रोजाना लगभग 1400 मीट्रिक टन कूड़ा इस प्लांट में आता है। इस कूड़े को गीले और सूखे हिस्सों में अलग करने और गीले कूड़े से जैविक खाद बनाने के लिए कुल 13 ट्रामल (कूड़ा छानने वाली मशीनें) स्थापित की गई थीं। हैरत की बात यह है कि इनमें से सात ट्रामल पूरी तरह से खराब पड़ी हैं, जबकि बाकी मशीनें कूड़े के ढेर के बीच धूल फांक रही हैं। हाल ही में ‘अमर उजाला’ की टीम जब प्लांट पर पहुंची, तो केवल दो ट्रामल ही काम करते पाए गए।
जैविक खाद बनाने वाले प्लांट में खाद के ढेर के बजाय, चारों ओर कूड़े के पहाड़ ही ऊंचे होते जा रहे हैं। दो साल पहले तत्कालीन नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने प्लांट के गेट के पास से लगभग 200 मीटर अंदर तक जमा कूड़े को साफ करवाकर जगह खाली करवाई थी, लेकिन उचित निस्तारण न होने से वही जगह फिर से कूड़े के विशालकाय ढेर में तब्दील हो गई है। जेसीबी और पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल कर इन कूड़े के पहाड़ों को और भी ऊंचा किया जा रहा है, जिससे समस्या और भी विकराल रूप लेती जा रही है।
गर्मी आते ही कूड़े में आग, जहरीला धुआं बना जानलेवा
प्लांट में कार्यालय के पीछे से पांडु नदी के पास तक वर्षों से डंप लाखों मीट्रिक टन कूड़े में गर्मी शुरू होते ही आग लगने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों से जमा कूड़े में मीथेन गैस बनने लगती है, और तापमान बढ़ने पर यह स्वतः ही आग पकड़ लेती है। इस आग से निकलने वाला धुआं बेहद जहरीला होता है और यह जमुई, बदुआपुर, कला का पुरवा, पनका, पनका बहादुरनगर, पनकी पड़ाव, सुंदरनगर, गंगागंज जैसे गांवों से लेकर रतनपुर और भौंती तक के जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।
बदुआपुर की मंजू देवी कहती हैं, “धुएं के कारण घर में भी रहना मुश्किल हो गया है। बच्चों के स्कूल की छुट्टी होते ही मैं अपने मायके चली जाऊंगी।” वहीं, रामकली का कहना है, “यह प्लांट हमारे गांव के लिए अभिशाप बन गया है। कई सालों से यहां आग लग रही है और जहरीले धुएं ने हमारी जिंदगी नारकीय बना दी है।”
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा: विशेषज्ञों की चेतावनी
एचबीटीयू के बायोकेमेस्ट्री विभाग के डॉ. श्रवण बताते हैं कि कूड़े में लगी आग से निकलने वाले धुएं में मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें होती हैं। मीथेन की अधिकता से सांस लेने में दिक्कत होती है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़े प्रभावित हो सकते हैं। कार्बन मोनो ऑक्साइड से चक्कर आने और बेहोशी तक की स्थिति बन सकती है, जबकि कार्बन डाई ऑक्साइड भी सांस लेने में तकलीफ पैदा करती है। ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग को भी बढ़ाती हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने चेताया कि कूड़ा जलने से खतरनाक टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) निकलते हैं। फौरी तौर पर सांस में दिक्कत, सिरदर्द और मिचली हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर, हृदय रोग, नर्वस सिस्टम की खराबी, प्रतिरोधक क्षमता में कमी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लिवर डैमेज, पुरुषों में मर्दाना कमजोरी और महिलाओं में बांझपन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
कानपुर के पनकी का यह ‘कूड़ा पहाड़’ केवल पर्यावरणीय संकट ही नहीं, बल्कि एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट भी बन गया है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।