कानपुर: गैस बुकिंग के नाम पर खाली हो रहे खाते, ठगों ने बिछाया फर्जी लिंक का जाल
कानपुर। शहर में पिछले कुछ दिनों से जारी एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत का फायदा अब साइबर अपराधी उठाने लगे हैं। साइबर ठगों ने उपभोक्ताओं की मजबूरी को अपना हथियार बना लिया है। कानपुर पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि गैस बुकिंग के नाम पर आने वाले किसी भी अनजान कॉल या मैसेज से सावधान रहें, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपके बैंक खाते को पूरी तरह खाली कर सकती है।
ठगी का नया तरीका: APK फाइल और फर्जी लिंक
साइबर अपराधी वर्तमान में गैस संकट का फायदा उठाकर लोगों के मोबाइल पर व्हाट्सएप और सामान्य एसएमएस के जरिए मैसेज भेज रहे हैं। इन मैसेज में गैस बुकिंग कंफर्म करने या सब्सिडी अपडेट करने के नाम पर एक लिंक दिया होता है। जांच में पाया गया है कि ये लिंक अक्सर APK (Android Package Kit) फाइलें होती हैं।
जैसे ही कोई उपभोक्ता इस लिंक पर क्लिक करता है, यह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हो जाती है और फोन का पूरा नियंत्रण ठगों के पास चला जाता है। इसके बाद आपके मैसेज, ओटीपी और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है, जिससे वे चंद मिनटों में आपका खाता साफ कर देते हैं।
सावधानी ही बचाव: इन मामलों से लें सबक
शहर के कई हिस्सों से इस तरह के संदिग्ध मैसेज आने की खबरें मिल रही हैं। पुलिस ने दो प्रमुख मामलों का उदाहरण देकर लोगों को सतर्क किया है:
- मामला एक: कैंट के एक दुकानदार के पास व्हाट्सएप पर बुकिंग प्रक्रिया पूरी करने का मैसेज आया। सूझबूझ दिखाते हुए उन्होंने लिंक पर क्लिक करने के बजाए अपनी गैस एजेंसी से संपर्क किया, जहाँ पता चला कि विभाग ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजता।
- मामला दो: रेलबाजार के एक युवक को ऑनलाइन पैसे जमा करने का झांसा दिया गया। उन्होंने संदिग्ध नंबर पर पेमेंट करने के बजाय सीधे गैस एजेंसी जाकर भुगतान किया और धोखाधड़ी से बच गए।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह
पूर्वी जोन के साइबर सेल प्रभारी प्रदीप सिंह तलावत के अनुसार, लोग इंटरनेट पर हेल्पलाइन नंबर या बुकिंग वेबसाइट सर्च करते हैं। अपराधी अक्सर गूगल सर्च इंजन में फर्जी नंबर “सर्च ऑप्टिमाइजेशन” के जरिए ऊपर ले आते हैं। जब लोग इन नंबरों पर कॉल करते हैं, तो ठग खुद को गैस अधिकारी बताकर उनसे ओटीपी या निजी जानकारी मांगते हैं।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
- अनजान लिंक से बचें: किसी भी परिस्थिति में अनजान नंबर से आए लिंक या APK फाइल को डाउनलोड न करें।
- आधिकारिक ऐप का प्रयोग करें: गैस बुकिंग के लिए केवल संबंधित कंपनी (जैसे Indane, Bharat Gas या HP) के आधिकारिक मोबाइल ऐप या उनकी वेबसाइट का ही उपयोग करें।
- OTP कभी साझा न करें: बैंक हो या गैस एजेंसी, कोई भी कभी भी आपसे आपका गोपनीय ओटीपी (OTP) नहीं मांगता।
- सर्च इंजन पर भरोसा न करें: गूगल पर मिलने वाले कस्टमर केयर नंबरों की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
- पेमेंट की सावधानी: गैस बुकिंग के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा मांगे गए ‘रजिस्ट्रेशन शुल्क’ या ‘छोटा अमाउंट’ देने से बचें।
विपिन ताडा (अपर पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था) ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता सतर्क रहकर ही इस ठगी से बच सकते हैं। यदि आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो तत्काल 1930 नंबर पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
कानपुर में गैस की किल्लत अस्थायी हो सकती है, लेकिन साइबर ठगी से होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है। डिजिटल युग में आपकी एक सावधानी ही आपकी जमा पूंजी की सुरक्षा की गारंटी है।