कानपुर: खाकी की संवेदनहीनता! मेडिकल रिपोर्ट के बाद भी 7 दिन तक टलती रही FIR, अब ADCP के आदेश पर दर्ज हुआ तीन तलाक का केस
कानपुर (चकेरी): उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। चकेरी थाना क्षेत्र में एक तीन तलाक पीड़िता न्याय पाने के लिए सात दिनों तक थाने के चक्कर काटती रही, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण तो करा लिया था, लेकिन रिपोर्ट आने के बावजूद कानूनी कार्रवाई में ढिलाई बरती गई। अंततः एडीसीपी (ADCP) के कड़े रुख के बाद मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
पीड़िता के अनुसार, उसका पति अरशद न केवल उसके साथ बेरहमी से मारपीट करता था, बल्कि उसके अन्य महिलाओं के साथ अवैध संबंध भी थे। जब भी पीड़िता ने पति के इन कृत्यों का विरोध किया, उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मामला तब और बिगड़ गया जब आरोपी पति ने उसे ‘तीन तलाक’ देकर घर से निकालने की कोशिश की।
पीड़िता ने सात दिन पहले चकेरी थाने में न्याय की गुहार लगाते हुए लिखित प्रार्थना पत्र दिया था। पुलिस ने प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया, जिसमें मारपीट की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद, स्थानीय पुलिस मामले को टालती रही और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में सात दिन की देरी की गई।
एडीसीपी के हस्तक्षेप से मिली राहत
पीड़िता जब दर-दर भटकने के बाद भी न्याय नहीं पा सकी, तो उसने उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। मामला एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा के संज्ञान में आया। एडीसीपी ने तत्काल मामले की गंभीरता को देखते हुए चकेरी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और आरोपी पति के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
एडीसीपी के आदेश के बाद पुलिस ने आनन-फानन में आरोपी अरशद के खिलाफ तीन तलाक कानून और मारपीट की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है।
लापरवाह पुलिसकर्मियों पर गिरेगी गाज
इस मामले में केवल अपराधी के खिलाफ ही नहीं, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है जिन्होंने पीड़िता को सात दिनों तक परेशान किया। एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने उन संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, जिन्होंने मेडिकल रिपोर्ट होने के बावजूद समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की।
कानूनी और सामाजिक पहलू
कानपुर की यह घटना एक बार फिर पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बावजूद कि महिलाओं से संबंधित अपराधों में तत्काल कार्रवाई की जाए, स्थानीय स्तर पर ऐसी लापरवाही शासन की छवि को प्रभावित करती है। तीन तलाक (मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम) के तहत कार्रवाई में देरी करना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि पीड़िता के मानसिक उत्पीड़न को भी बढ़ाता है।
पुलिस का अगला कदम
फिलहाल चकेरी पुलिस आरोपी पति की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। साथ ही, पीड़िता को सुरक्षा और न्याय का पूरा भरोसा दिलाया गया है।