लखनऊ

UP News: यूपी बार काउंसिल चुनाव की मतगणना 24 मार्च से, लखनऊ में 17 अप्रैल को जुटेगा उत्तर भारत के कृषि मंत्रियों का महाकुंभ

उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता समाज के लिए एक बड़ी खबर है। यूपी बार काउंसिल के सदस्यों के चुनाव की बहुप्रतीक्षित मतगणना की तिथि घोषित कर दी गई है। चुनाव अधिकारी और काउंसिल के सचिव रामकिशोर शुक्ल द्वारा जारी सूचना के अनुसार, मतगणना की प्रक्रिया 24 मार्च 2026 से प्रयागराज में शुरू होगी।

मतगणना का शेड्यूल और प्रक्रिया

​मतगणना प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेगी। इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प रहा है, क्योंकि मैदान में कुल 332 अधिवक्ता प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। प्रदेश के 75 जिलों में 82 अलग-अलग स्थलों पर चरणों में मतदान संपन्न हुआ था।

​आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश के लगभग 2.51 लाख पंजीकृत अधिवक्ता मतदाताओं में से करीब 1.75 लाख (पौने दो लाख) अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। चुनाव का अंतिम चरण 15 मार्च को लखनऊ में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था। अब सभी की निगाहें प्रयागराज पर टिकी हैं, जहाँ से अगले कुछ दिनों में यूपी बार काउंसिल के नए स्वरूप की तस्वीर साफ होगी।

17 अप्रैल को लखनऊ में ‘कृषि क्षेत्रीय सम्मेलन’ का आयोजन

​न्यायिक जगत की सरगर्मियों के बीच, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 17 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण सरकारी आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जानकारी दी है कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में लखनऊ में ‘कृषि क्षेत्रीय सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा।

सम्मेलन में शामिल होंगे दिग्गज

​इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ-साथ उत्तर भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आमंत्रित राज्यों की सूची में शामिल हैं:

  • ​हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश
  • ​उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़
  • ​जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

​इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस आयोजन को नीतिगत रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य

​कृषि मंत्री शाही के अनुसार, यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र की समस्याओं और समाधानों के लिए एक ‘प्रभावी मंच’ होगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. योजनाओं की समीक्षा: केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं (जैसे पीएम-किसान, फसल बीमा आदि) के क्रियान्वयन की प्रगति जांची जाएगी।
  2. विचार-विमर्श: कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों (पशुपालन, मत्स्य पालन आदि) से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी।
  3. बेस्ट प्रैक्टिसेज: अलग-अलग राज्यों द्वारा कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही ‘सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों’ (Best Practices) को साझा किया जाएगा ताकि एक राज्य की सफलता का लाभ दूसरे राज्य के किसानों को भी मिल सके।

निष्कर्ष

​मार्च और अप्रैल का महीना उत्तर प्रदेश के लिए प्रशासनिक और सामाजिक रूप से काफी व्यस्त रहने वाला है। एक ओर जहाँ अधिवक्ताओं का भविष्य मतपेटियों से निकलेगा, वहीं दूसरी ओर लखनऊ में होने वाला सम्मेलन उत्तर भारत के करोड़ों किसानों की तकदीर और कृषि नीतियों को नई दिशा देने का काम करेगा।

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