औरैया: पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 9 को जेल, गैंगस्टर एक्ट में मिली 6 साल की सजा; जानें पूरा मामला
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। बहुचर्चित नारायणपुर दोहरा हत्याकांड के मुख्य आरोपी और समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी (MLC) कमलेश पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। औरैया की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने मंगलवार को गैंगस्टर एक्ट के तहत फैसला सुनाते हुए कमलेश पाठक को 6 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने इस मामले में कमलेश पाठक के भाइयों समेत कुल 9 लोगों को दोषी करार दिया है। जहाँ मुख्य आरोपी को 6 साल की सजा मिली है, वहीं अन्य 8 दोषियों को 5-5 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।
₹1 लाख का जुर्माना और भारी सुरक्षा
सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने आर्थिक दंड भी लगाया है। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि अन्य सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका गया है। फैसले के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कमलेश पाठक को आगरा जेल से और अन्य आरोपियों को प्रदेश की विभिन्न जेलों से लाकर कोर्ट में पेश किया गया था। सजा के ऐलान के बाद सभी को पुनः कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।
क्या था मामला? (नारायणपुर दोहरा हत्याकांड)
यह पूरा मामला 15 मार्च 2020 का है। औरैया शहर के मोहल्ला नारायणपुर स्थित पंचमुखी मंदिर परिसर में जमीन विवाद को लेकर दिनदहाड़े फायरिंग हुई थी। इस हिंसक वारदात में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस दोहरे हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। तत्कालीन पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कमलेश पाठक, उनके भाइयों और समर्थकों समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया था।
जुलाई 2020 में पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। जाँच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आज कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।
इन लोगों को मिली सजा
कोर्ट ने जिन लोगों को दोषी पाया है, उनमें प्रभावशाली नाम शामिल हैं:
- कमलेश पाठक (पूर्व एमएलसी) – 6 साल की सजा
- संतोष पाठक (भाई) – 5 साल की सजा
- रामू पाठक (भाई) – 5 साल की सजा
- कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे और रविंद्र उर्फ लाला चौबे – सभी को 5-5 साल की सजा।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में नामजद गनर अवनीश प्रताप को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। वहीं, एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।
प्रशासन की बड़ी जीत
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत औरैया पुलिस और अभियोजन पक्ष के लिए इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। माफिया और संगठित अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान में यह फैसला नजीर साबित होगा।