काशी विश्वनाथ धाम: अब अर्चक और सुरक्षाकर्मी सीखेंगे ‘सॉफ्ट स्किल्स’, श्रद्धालुओं से मधुर व्यवहार के लिए मिली विशेष ट्रेनिंग
वाराणसी: विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Dham) की छवि को वैश्विक स्तर पर और अधिक भव्य और सुगम बनाने के लिए मंदिर प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है। बुधवार को मंदिर के अर्चकों, शास्त्रियों, सुरक्षाकर्मियों और स्वच्छता कर्मियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र (Training Session) आयोजित किया गया। इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक सुखद और आध्यात्मिक बनाना है।
व्यवहार में बदलाव: क्रोध नियंत्रण और तनाव प्रबंधन पर जोर
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में कर्मचारियों को सॉफ्ट स्किल्स (Soft Skills) को बेहतर करने के गुर सिखाए गए। अक्सर भारी भीड़ और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में तनाव और चिड़चिड़ापन देखा जाता है। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने उन्हें निम्नलिखित बिंदुओं पर ट्रेनिंग दी:
- क्रोध नियंत्रण (Anger Management): भीड़ के दबाव में भी संयम कैसे बनाए रखें।
- तनाव प्रबंधन (Stress Management): कार्यस्थल की चुनौतियों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना।
- संतुलन (Work-Life Balance): निजी जीवन और कार्यस्थल के बीच सही सामंजस्य बिठाना ताकि मानसिक शांति बनी रहे।
”काशी की छवि आपके व्यवहार में है”
ट्रेनिंग के दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विश्वभूषण मिश्रा और एसडीएम शंभू शरण ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि “काशी विश्वनाथ धाम में देश-दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। यदि किसी कर्मचारी का व्यवहार एक भी श्रद्धालु के प्रति खराब होता है, तो वह केवल उस व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरी काशी की छवि खराब करता है।”
प्रशासन का मानना है कि मंदिर का स्टाफ ही धाम का ‘फेस’ (Face) होता है, इसलिए उनका विनम्र और सहायक होना अनिवार्य है।
आध्यात्मिक शक्ति के लिए ‘मंत्र जाप’ और ‘ध्यान’ की सलाह
इस ट्रेनिंग की सबसे खास बात यह रही कि कर्मचारियों को केवल पेशेवर तरीके ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक तरीके भी सुझाए गए। मंदिर प्रशासन ने अर्चकों और कार्मिकों को सलाह दी है कि वे:
- प्रतिदिन एक घंटे मंत्रों का जाप करें: इससे मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- नियमित ध्यान (Meditation): रोज ध्यान करने से मन शांत रहता है, जिससे सेवा भाव में वृद्धि होती है।
दर्शन सहायकों और स्वच्छता कर्मियों की भूमिका
सिर्फ अर्चक ही नहीं, बल्कि सुरक्षाकर्मियों और दर्शन सहायकों को भी प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद अधिक संवेदनशीलता के साथ कर सकें। स्वच्छता एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि सफाई के साथ-साथ श्रद्धालुओं के साथ उनका संवाद भी मर्यादित होना चाहिए।
निष्कर्ष
काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प केवल पत्थरों और गलियारों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ‘मानवीय व्यवहार’ के कायाकल्प पर भी काम किया जा रहा है। यह पहल निश्चित रूप से काशी आने वाले शिवभक्तों के लिए एक यादगार और शांतिपूर्ण अनुभव सुनिश्चित करेगी।