वाराणसी

​वाराणसी: शहनाई की मंगलध्वनि और घुंघरुओं की झंकार, शीतला संगीत महोत्सव की तीसरी निशा में रमे भक्त

वाराणसी (उत्तर प्रदेश): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी के घाट एक बार फिर सुरों और ताल की त्रिवेणी से सराबोर हैं। दशाश्वमेध घाट स्थित सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतला माता माई धाम में आयोजित वार्षिक ‘शीतला संगीत महोत्सव’ अपनी भव्यता के चरम पर है। महोत्सव की तीसरी निशा (बृहस्पतिवार) को कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से मां शीतला का ऐसा भावपूर्ण शृंगार किया कि गंगा तट पर मौजूद हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया।

मां का दिव्य अभिषेक और पूजन

​संगीतांजलि की शुरुआत से पहले धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। सिद्धपीठ में माता रानी को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके पश्चात उन्हें नूतन वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण और रजत छत्र अर्पित कर अलौकिक शृंगार किया गया। पूजन का कार्य पं. रवि शंकर पांडेय, साधु गुरु मनीष पांडेय और पं. ऋषि शंकर पांडेय ने षोडशोपचार विधि से पूर्ण किया। अंत में महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ‘लिंगिया’ ने मां की भव्य आरती उतारी, जिसके बाद पूरा परिसर ‘जय माता दी’ के उद्घोष से गूंज उठा।

शहनाई से हुई मंगल शुरुआत

​महोत्सव का सांस्कृतिक आगाज़ दिलीप शंकर और उनके साथियों ने किया। उन्होंने शहनाई की मधुर ध्वनि पर राग मारू बिहाग आधारित सोहर की लोकप्रिय धुनें बिखेरीं। शहनाई की गूंज ने वातावरण में एक आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रख्यात गीतकार कन्हैया दुबे ‘केडी’ ने किया।

कथक की रुनझुन और भाव-भंगिमाएं

​तीसरी निशा का मुख्य आकर्षण कथक नृत्य रहा। प्रख्यात नृत्यांगना मांडवी सिंह और शांभवी सेठ ने युगल प्रस्तुति दी। उन्होंने देवी स्तुति ‘या देवी सर्वभूतेषु…’ पर आधारित अपनी नृत्य संरचना से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक कथक की बारीकियों, लयबद्ध पद संचालन (Footwork) और ‘घोड़े की चाल’ जैसी कठिन भाव-भंगिमाओं को उन्होंने इतनी सुगमता से पेश किया कि मुक्ताकाशी मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

​इस प्रस्तुति में तबले पर अवंतिका महाराज और पं. भोलानाथ मिश्र, हारमोनियम व गायन पर आनंद किशोर मिश्रा तथा बोल-पढ़ंत पर डॉ. ममता टंडन ने बेहतरीन संगत की। इसके अलावा अदिति शर्मा और दिव्यंका श्रीवास्तव ने अपनी शिव वंदना से भक्ति का संचार किया।

लोक गीतों और भजनों की बयार

​भजन संध्या में डॉ. विजय कपूर ने चैती की पारंपरिक शैली में ‘जाइब देवी के दुवरिया हो रामा…’ गाकर बनारसी अंदाज़ जीवंत कर दिया। वहीं लोक गायिका ज्योति माही ने ‘तू ना सुनेगी तो कौन सुनेगा…’ और ‘लाल रंग डोलिया…’ जैसे देवी गीतों से खूब वाहवाही बटोरी। लकी राय, महिमा, अनुराग आर्य, सनी मिश्रा और पिंकी मिश्रा जैसे युवाओं ने भी अपने सुरों से मां के चरणों में हाजिरी लगाई।

आज (शुक्रवार) की चौथी निशा के आकर्षण

​महोत्सव की चौथी निशा और भी खास होने वाली है। शुक्रवार को गोरखपुर के प्रख्यात भजन गायक नंदू मिश्रा, भरत प्रसन्ना की शहनाई और शिल्पा राय का कथक मुख्य आकर्षण रहेंगे। इनके साथ ही प्रियांशु, नीरज पांडेय, रजनी द्विवेदी और कई अन्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

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