मथुरा

मथुरा में गरीबों के निवाले पर डाका: 149 क्विंटल सरकारी चावल से लदा ट्रक पकड़ा, राशन माफिया और डीलरों के नापाक गठबंधन का खुलासा

प्रस्तावना: सुरीर में बड़ी कार्रवाई

​उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में गरीबों के हक के राशन की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सुरीर इलाके में पुलिस और जिला पूर्ति विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर सरकारी चावल से लदा एक ट्रक पकड़ा है। इस कार्रवाई ने राशन माफियाओं और स्थानीय डीलरों के बीच चल रहे उस सिंडिकेट को बेनकाब कर दिया है, जो सरकारी अनाज को खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

ट्रक छोड़कर भागा चालक, 272 कट्टे चावल बरामद

​घटना शनिवार की है, जब सुरीर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक ट्रक में भारी मात्रा में सरकारी राशन की तस्करी की जा रही है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरीर अंडरपास पर ट्रक संख्या (UP 85 FT 9402) को घेराबंदी कर रोक लिया।

​पुलिस को देखते ही चालक ट्रक छोड़कर मौके से फरार हो गया, जिससे तस्करी का अंदेशा पुख्ता हो गया। जांच करने पर ट्रक के अंदर से प्लास्टिक के 157 और जूट के 115 कट्टे बरामद हुए। कुल 272 कट्टों में 149.10 क्विंटल चावल लदा पाया गया।

पूर्ति विभाग की जांच और FIR

​सूचना पर मांट के क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी नरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। अनाज की जांच में पुष्टि हुई कि यह वही चावल है जो गरीबों को सरकारी राशन की दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाना था।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

  • बरामदगी: 149.10 क्विंटल सरकारी चावल।
  • सुपुर्दगी: बरामद अनाज को ओहावा गांव के राशन विक्रेता चतुर सिंह की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
  • कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने वाहन स्वामी जगदीश (निवासी सुरीर विजऊ) के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।

कैसे होता है यह काला खेल?

​जांच में सामने आया है कि राशन माफिया और कुछ भ्रष्ट राशन डीलर आपस में मिले हुए हैं।

  1. सस्ते में खरीद: माफिया डीलरों से सांठगांठ कर गरीबों का अनाज बेहद कम दाम पर उठा लेते हैं।
  2. कागजों में वितरण: डीलर कागजों पर राशन का वितरण दिखा देते हैं, जबकि असल में अनाज ट्रकों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है।
  3. ऊंचे दामों पर बिक्री: तस्करी किए गए इस चावल को ऊंचे दामों पर खुले बाजार या राइस मिलों में बेच दिया जाता है, जिसका मुनाफा माफिया और डीलरों के बीच बंटता है।

प्रशासन की चेतावनी

​जिला पूर्ति विभाग ने साफ कर दिया है कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फरार ट्रक चालक की तलाश जारी है और वाहन स्वामी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह अनाज किस डीलर के यहाँ से लोड हुआ था और इसे कहाँ भेजा जा रहा था।

निष्कर्ष: गरीबों के हक पर पहरा जरूरी

​मथुरा की यह घटना बताती है कि शासन की लाख सख्ती के बावजूद राशन माफिया सक्रिय हैं। गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले इन गिरोहों पर नकेल कसने के लिए न केवल प्रशासनिक सतर्कता, बल्कि आम जनता की जागरूकता भी जरूरी है।

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