वाराणसी

वाराणसी में रात 10 बजे के बाद ट्रैफिक भगवान भरोसे: गोदौलिया-सोनारपुरा मार्ग बेपटरी, नियमों की धज्जियाँ उड़ाते ई-रिक्शा; पुलिस नदारद

प्रस्तावना: दिन में ‘स्मार्ट’, रात में ‘लाचार’ काशी

​प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र और धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र वाराणसी में दिन के समय ट्रैफिक व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ बनाने के लाख दावे किए जाएं, लेकिन सूरज ढलते ही हकीकत कुछ और ही बयां करती है। शहर में जाम की समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है, लेकिन सबसे खराब स्थिति रात 10 बजे के बाद बनती है। जब देश के अन्य शहरों में ट्रैफिक सामान्य होने लगता है, काशी की सड़कों पर अराजकता का नया अध्याय शुरू होता है। रात होते ही यहाँ ट्रैफिक सिग्नल महज एक ‘शोपीस’ बन जाते हैं और नियमों का पालन कराना तो दूर, पुलिसकर्मी भी सड़कों से नदारद दिखते हैं।

ट्रैफिक सिग्नल: सिर्फ एक औपचारिकता

​रात 10 बजे की समयसीमा पार होते ही शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल अपनी प्रासंगिकता खो देते हैं। रेड-ग्रीन लाइट की परवाह किए बिना वाहन चालक अपनी सुविधा के अनुसार सड़कों को ‘वन-वे’ या ‘टू-वे’ बना देते हैं। एक लेन से दूसरी लेन में बेतहाशा वाहन घुसाने की होड़ में कई बार वाहन चालकों के बीच तीखी कहासुनी और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। यह अराजकता न केवल जाम का कारण बनती है, बल्कि गंभीर हादसों को भी आमंत्रण देती है।

सबसे ज्यादा समस्या इन मार्गों पर

1. सोनारपुरा से गोदौलिया मार्ग: ई-रिक्शा और टोटो का ‘आतंक’

​यह मार्ग वाराणसी के सबसे संवेदनशील और व्यस्ततम इलाकों में से एक है। रात के समय यहाँ ई-रिक्शा, टोटो और निजी वाहनों का संचालन बिना किसी रोक-टोक के होता है। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सोनारपुरा तिराहे पर पुलिस बैरियर लगाया गया है, जो शाम तक प्रभावी रहता है। लेकिन, अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, रात दस बजे के बाद पुलिस की मौजूदगी नहीं होने पर मनबढ़ वाहन चालक खुद ही उस भारी बैरियर को सड़क से हटाकर किनारे कर देते हैं और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद जो जाम लगता है, उसे सुलझाने वाला कोई नहीं होता।

2. काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र से चौक: श्रद्धालुओं की फजीहत

​धार्मिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में भी रात के समय नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ती हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र से चौक की ओर टोटो और ई-रिक्शा का संचालन खुलेआम होता है, जबकि कई संकरे मार्गों पर इनके प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध है। रात में कोई रोक-टोक न होने से मंदिर से दर्शन कर निकलने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। वे घंटों जाम में फंसकर प्रशासन को कोसते नजर आते हैं।

अधिकारियों का आश्वासन: ‘सिटी कमांड कंट्रोल’ से होगी जांच

​इस बढ़ती अराजकता और पुलिस की निष्क्रियता पर जब अमर उजाला ने संबंधित अधिकारियों से बात की, तो आश्वासन का पुराना दौर फिर शुरू हुआ। बांसफाटक क्षेत्र में देर रात व्यापारिक वाहनों के प्रवेश पर एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्रा ने कहा कि व्यापारिक कार्यों के लिए देर रात वाहन आते हैं, उन्हें नियंत्रित किया जाएगा। सोनारपुरा या मैदागिन के पास लगे पुलिस बैरियर को हटाने की गंभीर बात पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

​उन्होंने यह भी दावा किया कि नियमों को तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्रा ने कहा, “सिटी कमांड कंट्रोल से कैमरों की फुटेज निकालकर उन सभी वाहन चालकों को चिह्नित किया जाएगा जो रात में नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

निष्कर्ष: क्या ‘कैमरे’ ही सुधारेंगे ट्रैफिक?

​वाराणसी में रात के समय ट्रैफिक की यह भयावह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब तक सड़कों पर पुलिस की भौतिक मौजूदगी नहीं होगी और बैरियर हटाने वालों पर तत्काल ऐक्शन नहीं होगा, तब तक केवल ‘कैमरों’ की फुटेज निकालकर कार्रवाई करने का आश्वासन कागजी ही साबित होगा। काशी को वास्तव में ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए दिन के साथ-साथ रात की सुरक्षा और व्यवस्था पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है।

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